बरेली : यूपी के बरेली बार एसोसिएशन के सचिव वीपी ध्यानी अब हमारे बीच नहीं रहे। वह लम्बे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। अधिवक्ता ध्यानी ने सोमवार देर रात पीजीआई से बरेली लाते समय अंतिम सांस ली। जैसे ही उनके देहांत की सूचना अधिवक्ता समाज तक पहुंची, पूरे बार परिसर में शोक की लहर दौड़ गई। उनके निधन की सूचना से हर कोई स्तब्ध रह गया। सरल व्यक्तित्व वाले वीपी ध्यानी न केवल एक वरिष्ठ अधिवक्ता थे, बल्कि अपने सरल स्वभाव, सहयोगी दृष्टिकोण और सामाजिक सरोकारों को लेकर भी बेहद लोकप्रिय थे। वह बार एसोसिएशन के सचिव पद पर तीसरी बार चुने गए थे, जो उनकी लोकप्रियता और कार्यशैली को दर्शाता है।
बार परिसर रहा बंद, न्यायिक कार्य ठप
उनके निधन की खबर के बाद बरेली बार एसोसिएशन और अधिवक्ताओं में शोक की लहर दौड़ गई। बार के अध्यक्ष मनोज कुमार हरित सहित तमाम पदाधिकारियों ने शोक संवेदना व्यक्त कर न्यायिक कार्यों से विरत रहने की घोषणा की। अदालतों में किसी भी केस की सुनवाई नहीं हुई और बकालतनामा काउंटर भी बंद रहा। न्यायिक अधिकारियों ने भी गहरी संवेदना व्यक्त की। दोपहर डेढ़ बजे अधिवक्ता एवं न्यायिक अधिकारियों ने एकत्र होकर शोक सभा आयोजित की। सभा में सभी ने वीपी ध्यानी की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की।
श्मशान भूमि में अंतिम विदाई, उमड़ा अधिवक्ताओं का सैलाब
सिटी श्मशान भूमि में वीपी ध्यानी की अंत्येष्टि की गई। अंतिम दर्शन के लिए अधिवक्ता समाज के सैकड़ों लोग मौजूद रहे। शोकाकुल माहौल में अधिवक्ता, बार पदाधिकारी और न्यायिक अधिकारी उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। इस मौके पर बार अध्यक्ष मनोज कुमार हरित, बार पदाधिकारी शेर सिंह गंगवार, सुल्तान खान एडवोकेट, वरिष्ठ अधिवक्ता इम्तियाज़ हुसैन एडवोकेट, नसीम अहमद एडवोकेट, रईस अहमद एडवोकेट, सपा के प्रदेश प्रवक्ता मुहम्मद साजिद और मसूद अली पीरजादा समेत तमाम प्रमुख लोगों ने अफसोस जाहिर कर खिराज ए अकीदत पेश की।
सारथी जैसे थे अधिवक्ताओं के सुख-दुख में
ध्यान देने योग्य बात यह है कि वीपी ध्यानी न केवल संगठनात्मक रूप से मजबूत स्तंभ थे, बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी सभी के सुख-दुख में भागीदार रहते थे। अधिवक्ताओं के बीच उन्हें “सारथी” के रूप में याद किया जाता रहा। उनके निधन ने बरेली के अधिवक्ता समाज में एक बड़ी रिक्तता पैदा कर दी है, जिसे भर पाना बेहद मुश्किल होगा।
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