श्रोताओं ने सोशल मीडिया पर की तारीफ, बताया मुल्क के अमन को कविता पर अमल जरूरी
लखनऊ : देश के मौजूदा सामाजिक और राजनीतिक परिदृश्य में जब वैचारिक मतभेदों की खाई बढ़ती जा रही है, तो ऐसे समय में पूर्व सांसद एवं कवि उदय प्रताप सिंह की रचना “न मेरा है, न तेरा है, ये हिन्दुस्तान सबका है” एक ताज़ा और प्रेरणादायक हवा का झोंका बनकर सामने आई है। यह कविता न केवल एकता और भाईचारे का सशक्त संदेश देती है, बल्कि यह भी याद दिलाती है कि भारत एक व्यक्ति या विचारधारा की जागीर नहीं, बल्कि हम सभी का साझा घर है। इस कविता के माध्यम से एकता, समरसता, और साझी संस्कृति का संदेश दिया गया है। इसमें भारत की विविधता को उसकी ताकत बताया गया है, और यह भी कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति, जाति, धर्म या सत्ता भारत को अपने तक सीमित नहीं कर सकती – यह देश सबका है।
कविता की मुख्य पंक्तियाँ जो दिल को छू जाती हैं…
“न मेरा है, न तेरा है, ये हिन्दुस्तान सबका है।
नहीं समझी गई ये बात, तो नुकसान सबका है।”
इन पंक्तियों में कवि ने एक गहरी सच्चाई को सरल शब्दों में बयान किया है, जब तक हम यह नहीं समझेंगे कि यह देश सभी का है, तब तक विभाजन और संघर्ष जारी रहेगा।
आप भी पढ़ें पूरी कविता
न मेरा है, न तेरा है,
ये हिन्दुस्तान सबका है।
नहीं समझी गई ये बात,
तो नुकसान सबका है।हज़ारों रास्ते खोजे गए
उस तक पहुँचने के,
मगर पहुँचे हुए से
कह गए भगवान सबका है।जो इसमें मिल गई
वो नदियाँ वे दिखाई नहीं देती,
महासागर बनाने में
मगर योगदान सबका है।अनेकों रंग, ख़ुशबू,
बातों के फूल पौधे हैं,
मगर उपवन को बनाने में रखावान सबका है।हक़ीकत आदमी की
और सपनों का घर धरती का,
जो ललाइए उसे ही
ख़ाली मैदान सबका है।जग से प्यार की
ख़ुशियों की हर इलाही तस्सली है,
मुक़द्दर अपना-अपना है,
मगर आसमान सबका है।उदय झूठी कहानी है
सभी राजा और रानी की,
जिसे हम वक़्त कहते हैं
वही सुल्तान सबका है।
जानें इस कविता का भावार्थ (अर्थ) और भावनात्मक विश्लेषण
1.न मेरा है, न तेरा है, ये हिन्दुस्तान सबका है।
देश किसी एक व्यक्ति या समूह की जागीर नहीं है, यह पूरे समाज, हर नागरिक का है।
2.नहीं समझी गई ये बात, तो नुकसान सबका है।
अगर, हम यह बात नहीं समझेंगे, तो इसका दुष्परिणाम सबको भुगतना पड़ेगा।
3.हज़ारों रास्ते खोजे गए उस तक पहुँचने के, मगर पहुँचे हुए से कह गए भगवान सबका है।
जैसे हर धर्म, विचार, या आध्यात्मिक मार्ग अंततः एक ही सत्य की ओर ले जाता है – वैसे ही देश की भावना भी सबके लिए समान है।
4.जो इसमें मिल गई वो नदियाँ वे दिखाई नहीं देती, महासागर बनाने में मगर, योगदान सबका है। हर छोटी-छोटी कोशिश, हर नागरिक की भागीदारी देश को महान बनाती है, भले ही उसका योगदान दिखे ना दिखे।
5.अनेकों रंग, ख़ुशबू, बातों के फूल पौधे हैं, मगर, उपवन को बनाने में रखावान सबका है।
देश विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और विचारों का सुंदर बाग़ीचा है, और इसे सजाने-संवारने की जिम्मेदारी सबकी है।
6.हक़ीकत आदमी की और सपनों का घर धरती का, जो ललाइए उसे ही ख़ाली मैदान सबका है।
धरती सबकी है, सपने भी सबके हैं – लेकिन अगर किसी ने उसे बाँटना चाहा, तो वो सबके लिए बंजर हो जाएगी।
7.जग से प्यार की ख़ुशियों की हर इलाही तस्सली है, मुक़द्दर अपना-अपना है, मगर आसमान सबका है।
हर व्यक्ति का भाग्य अलग हो सकता है, पर जीवन जीने का आकाश – अधिकार, स्वतंत्रता और अवसर – सबके लिए है।
8.उदय झूठी कहानी है सभी राजा और रानी की, जिसे हम वक़्त कहते हैं वही सुल्तान सबका है।
इतिहास में राजा-महाराजाओं के नाम भले दर्ज हों, लेकिन असली ताकत और सच्चाई ‘वक्त’ यानी समय में है – जो सबका होता है और किसी का गुलाम नहीं।
भारत की विविधता में एकता का उत्सव
पूरी कविता भारत की विविधता, उसकी नदियों, रंगों, खुशबू, और आकाश का जिक्र करते हुए यह समझाती है कि प्रत्येक व्यक्ति, चाहे वह किसी भी क्षेत्र, भाषा, धर्म या जाति से जुड़ा हो—उसकी भागीदारी भारत की आत्मा को समृद्ध बनाती है। यह सिर्फ साहित्यिक सौंदर्य नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश भी है कि अधिकार और सम्मान हर नागरिक का है।
लेखक की सादगी में बसी गहराई
कवि उदय प्रताप सिंह, जिनका नाम कविता कोष जैसे प्रतिष्ठित मंच से जुड़ा है, ने यह रचना बेहद सहजता से लिखी है, लेकिन इसकी गूंज पाठकों के मन में लंबे समय तक बनी रहती है। उनकी लेखनी किसी धर्म, वर्ग या राजनैतिक सोच से परे जाकर भारत की “साझी संस्कृति” की बात करती है।
सोशल मीडिया पर मिली ज़बरदस्त प्रतिक्रिया
यह कविता जब सोशल मीडिया पर साझा की गई, तो लोगों ने इसे हाथों-हाथ लिया। हजारों लाइक्स, शेयर और टिप्पणियों में एक बात समान थी, लोग इस कविता के संदेश से जुड़ाव महसूस कर रहे हैं।
कई मदरसों के शिक्षकों ने इसे स्कूल की morning assembly में पढ़वाया, और कई संगठनों ने इसे अपने सौहार्द अभियानों का हिस्सा बना लिया है।
हमारी ओर से सलाम
The Justice Hindi की ओर से कवि उदय प्रताप सिंह को सलाम। जिन्होंने इतनी खूबसूरत कविता के माध्यम से भारत की आत्मा को शब्दों में बाँध दिया। हमें उम्मीद है कि ऐसी रचनाएं समाज को जोड़ने का काम करती रहेंगी…
