बरेली : यूपी के बरेली के अपर सत्र न्यायाधीश (एडीजे) तबरेज अहमद की अदालत ने मंगलवार को 2013 में बुजुर्ग की हत्या के मामले में चार आरोपियों को दस वर्ष का कठोर कारावास और दस- दस हजार रुपये का अर्थदंड देने की सजा सुनाई है। बरेली देहात के फतेहगंज पश्चिमी थाना क्षेत्र के औंध गांव में 28 मार्च, 2013 को गांव के ही सत्यप्रकाश उर्फ शिशुपाल,रोहित,मुन्ना सिंह और प्रदीप सिंह ने हुलासी राम के घर में जबरन घुसकर हमला कर दिया था। हुलासी राम की तरफ से दर्ज एफआईआर के मुताबिक आरोपियों ने लाठी डंडों से धारदार हथियार से हमला कर दिया। इसमें हुलसी राम, कोमिल प्रसाद और उनके भाई तेजराम को घायल कर दिया। उनकी भाभी मीना कुमारी बचाने आई। मगर, आरोपियों ने उन पर भी लाठी-डंडों से गंभीर रूप से घायल कर दिया। इसमें घायल हुलासी राम की निजी अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
शासकीय अधिवक्ता ने की मजबूत पैरवी
इस मामले में फतेहगंज पश्चिमी थाना पुलिस ने अपराध संख्या 230/2013 के तहत मुकदमा दर्ज किया। भारतीय दंड संहिता की धारा 323 (चोट पहुंचाना),324 (घातक हथियार से चोट), 308 (गैर-इरादतन हत्या का प्रयास), 304 (गैर-इरादतन हत्या), 504 (शांति भंग करने के उद्देश्य से अपशब्द कहना) और 34 (सामूहिक आपराधिक मंशा) आदि में मुकदमा दर्ज किया। सब इंस्पेक्टर सुरेश सिंह ने जांच की। इस मामले की सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता राजेश्वरी गंगवार और विवेक मिश्रा ने मजबूत पैरवी की, जबकि अभियुक्त पक्ष की ओर से अधिवक्ता अश्वनी कुमार शर्मा और अरविंद शर्मा ने पक्ष रखा।
12 साल बाद मिला न्याय
एडीजे तबरेज अहमद की कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर चारों आरोपियों को दोषी पाया और दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। अपर सत्र न्यायाधीश तबरेज अहमद ने अपने फैसले में कहा कि “समाज में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों में कठोर सजा दिया जाना आवश्यक है ताकि दूसरों को भी चेतावनी मिले।”
