गोंडा/लखनऊ/ इटावा : यूपी के इटावा जिले में 21 जून को कथावाचक विवाद पर अब योगगुरु बाबा रामदेव की भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। जिसमें वह कहते हैं “म्हारा भगवान भी दूसरे छीन लियो, ए कोई बात हुई? यदुवंशी की कथा यदुवंशी नहीं करेगा, तो कौन करेगा ? बात जातिवाद की नहीं है। भगवान सबके हैं। पर कोई कहे कि श्रीकृष्ण की कथा सिर्फ हम सुनाएंगे, यह सही नहीं है।”हालांकि बाबा रामदेव ने यह बयान किस स्थान से दिया, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
जानें कैसे शुरू हुआ विवाद
21 जून को मुकुटमणि, संत सिंह यादव और श्याम कठेरिया नामक कथावाचक भागवत कथा सुनाने इटावा पहुंचे थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने कथित रूप से महिलाओं से गलत व्यवहार, खाली कलश से पूजा कराने और जाति छिपाकर कथा सुनाने का आरोप लगाया। इसके बाद संत सिंह यादव की चोटी काट दी गई। कथावाचकों के खिलाफ FIR दर्ज हुई, आरोप- फर्जी आधार कार्ड बनवाना व जाति छिपाना, स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं तेज़।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव का समर्थन
कथावाचकों को लखनऊ बुलाकर सम्मानित किया था। 21-21 हजार रुपये व्यक्तिगत, और 51-51 हजार सपा की ओर से आर्थिक सहयोग दिया गया। पोस्टर जारी कर बीजेपी सरकार पर हमला बोला: “धर्म के नाम पर अपमान बर्दाश्त नहीं”।
कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय का बयान
“योगी सरकार में धर्म और जाति के नाम पर अपमान का नया दौर चल रहा है।”इस मामले में अखिलेश यादव पर जातिवाद फैलाने और बिना तथ्य अफवाह फैलाने का आरोप लगाया। बीजेपी नेताओं ने कहा कि “FIR तथ्यों के आधार पर दर्ज की गई है”।
ब्रजभूषण शरण सिंह ने भी की टिप्पणी
पूर्व सांसद बृजभूषण ने कहा कि “कथा कहने का अधिकार सबको है। जाति देख कर धर्म की व्याख्या करना सरासर गलत है।”कैसरगंज से पूर्व सांसद और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने कथावाचक मामले की निंदा की है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया है। इसकी मैं निंदा करता हूं। कथा कहने का सबको अधिकार है। उन्होंने कहा कि कथा मतलब अपना विचार होता है। कथा कोई भी कह सकता है। हम छात्रों संबोधित करते हैं, तो वो भी कथा है। इस देश के अंदर कथा कहने का सबको अधिकार है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने एक जाति और विशेष वर्ग के लोगों को बदनाम करने की कोशिश की है। इस घटना को गहराई से देखा जाए तो, इस घटना में व्यक्ति शामिल होंगे। इसमें समाज और जाति शामिल नहीं होंगे। इसलिए इस मामले में जातीय रंग देने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। इस घटना में जितने लोग शामिल हैं, उन्हें दंड मिलना चाहिए। घटना को अंजाम देने के पीछे कोई न कोई मंशा रहा होगा। इस लिए किसी जाति को बदनाम नहीं करना चाहिए।
