लखनऊ/गुवाहाटी : समाजवादी पार्टी ने असम में एक बड़ी चुनावी उपलब्धि हासिल कर राज्य के स्थानीय निकाय चुनावों में 8 वार्ड मेम्बर की सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके साथ ही पार्टी 2 जिला परिषद और 8 आंशुलिक पंचायत सीटों पर मामूली अंतर से बीजेपी-असम गण परिषद गठबंधन से पीछे रही। जिससे स्पष्ट होता है कि समाजवादी पार्टी अब असम में एक मजबूत राजनीतिक विकल्प बन रही है।
PDA विजन और डिंपल यादव के प्रयासों का असर: प्रो. भुवन जोशी
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव प्रो. भुवन जोशी ने इस जीत का श्रेय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के ‘PDA’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) विजन और सांसद डिंपल यादव द्वारा असम के प्रति विशेष स्नेह को दिया है। उन्होंने कहा कि “यह जीत असम में समाजवादी विचारधारा की स्वीकार्यता और नए विकल्प के रूप में पार्टी की पहचान को दर्शाती है। जनता ने विश्वास जताकर समाजवादी पार्टी को आगे बढ़ने का अवसर दिया है। इसके लिए हम आभारी हैं।”
ब्रोजन हैंडिक ने जताया शीर्ष नेतृत्व का आभार
समाजवादी पार्टी, असम के प्रदेश अध्यक्ष ब्रोजन कुमार हैंडिक ने अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के मार्गदर्शन और असम के स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित रणनीति के चलते यह सफलता मिली है। असम में पार्टी का विस्तार और जनसमर्थन तेज़ी से बढ़ रहा है।”
बीजेपी-असम गण परिषद और कांग्रेस को पछाड़ा
इन चुनावों में समाजवादी पार्टी ने न सिर्फ बीजेपी और उसके सहयोगी असम गण परिषद, बल्कि कांग्रेस, यूडीएफ और राइजिंग असम जैसे दलों को भी पीछे छोड़कर अपनी स्थिति मजबूत की है। यह प्रदर्शन पार्टी की जमीनी पकड़ और व्यापक सामाजिक जुड़ाव को दर्शाता है।
अब असम में सपा का नया चेहरा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी अब न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि पूर्वोत्तर भारत में भी राजनीतिक संभावनाओं का नया केंद्र बन सकती है। पार्टी का ‘PDए’ मॉडल युवाओं, किसानों, महिलाओं और सामाजिक रूप से वंचित वर्गों के बीच अपील करता दिखाई दे रहा है।
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