डॉ. सुनीलम का आरोप-“डबल इंजन सरकार कानून तोड़कर आदिवासियों को कुचल रही है”
सिंगरौली/रीवा/लखनऊ: सिंगरौली के धिरौली क्षेत्र में अडानी समूह को सौंपे गए 1400 हेक्टेयर वन क्षेत्र में 3 लाख 20 हजार पेड़ों की कटाई पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। किसान संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि सरकार ने जंगल बचाने की आवाज उठाने वाले हजारों आदिवासियों को नजरबंद कर दिया, पूरे क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी, और यहां तक कि बाजार बंद करवाकर भारी पुलिसबल तैनात कर दिया है। किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने कहा कि सिंगरौली पहले ही देश का सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर घोषित है, ऐसे में लाखों पेड़ काटने से पर्यावरण पूरी तरह तबाह हो जाएगा।
“आदिवासियों की आजीविका खतरे में, कानूनों का खुला उल्लंघन”: डॉ. सुनीलम

डॉ. सुनीलम ने सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा 3.2 लाख पेड़ काटे जाने से 8 गांवों के हजारों आदिवासी परिवारों की आजीविका समाप्त हो जाएगी। वन अधिकार कानून, भूमि अधिग्रहण कानून और पेसा कानून का पूरी तरह उल्लंघन किया जा रहा है। सदियों से वनों पर निर्भर आदिवासी परिवारों को बिना अधिकार दिए जबरन हटाया जा रहा है। विरोध कर रहे ग्रामीणों को नजरबंद कर “कानून व्यवस्था” के नाम पर दमन किया जा रहा है। उन्होंने मांग उठाई कि जंगल की कटाई पर तत्काल रोक लगे, आदिवासियों पर दर्ज फर्जी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं। झूठे मुकदमे दर्ज करने वाले अधिकारियों -कर्मचारियों को निलंबित किया जाए। अडानी कंपनी को दिया गया भूमि आवंटन निरस्त किया जाए, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्रवाई करे। पांचवीं अनुसूची का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज किया जाए।
सिंगरौली और रीवा में मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा

सिंगरौली में जिलाधीश को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान एड. अशोक सिंह पैगाम (जिला अध्यक्ष), लीलावती, फूलवंती, भगवान सिंह, अखिलेश कुमार शाह, अर्जून सिंह, धर्मराज सिंह मौजूद थे। इसके साथ ही रीवा में कमिश्नर और डीआईजी को ज्ञापन सौंपा गया। यहां प्रमुख पदाधिकारी इंद्रजीत सिंह शंखू (कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष), संतकुमार पटेल (प्रदेश सचिव), एड. पुष्पेंद्र सिंह (संभागीय संयोजक), अनिल मिश्रा (जिला सचिव), मोहम्मद तौहीद, शकील खान, वीरेंद्र सिंह,अखिलेश पटेल, संतोष पटेल,दौलत सिंह,रमेश वर्मा और शंकर बहादुर पटेल मौजूद थे।
