भारत-ईरान के ऐतिहासिक संबंधों को बताया मजबूत
कौशांबी/प्रयागराज : ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के विशेष प्रतिनिधि अब्दुल मजीद इलाही ने उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के दोआबा क्षेत्र के 22 गांवों के अजादारों और ताजियादारों के नाम एक खास संदेश जारी किया। भारत के आगा मीर सैयद अब्बास खोरसानी ने “The justice Hindi” को बताया कि 19 मार्च, 2026 को प्रतिनिधि ने शिराज (ईरान) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत, खासकर दोआबा क्षेत्र के अजादारों की धार्मिक निष्ठा और परंपराओं की सराहना की। बोले – इमाम हुसैन (अ.स.) की शहादत की खबर, जब भारत पहुंची थी, तब यहां के लोगों ने अजादारी की जो परंपरा शुरू की, वह आज भी मजबूती से जारी है। इसके साथ ही सैयद अली खामनेई की शहादत पर अजादरों और ताजियेदारों की तरफ से अफसोस जाहिर किया गया। इसके साथ ही भारतीय जहाजों को छोड़ने के लिए शुक्रिया (धन्यवाद) अदा किया।
भारतीय अजादारों की भूमिका काबिले-तारीफ

अब्दुल मजीद इलाही ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय अजादारों की भूमिका काबिले -तारीफ है, और यह परंपरा धार्मिक एकता और समर्पण का प्रतीक है।उन्होंने विशेष रूप से कौशांबी के 22 गांवों के लोगों को धन्यवाद दिया और उनके योगदान को अहम बताया। इसके अलावा यह भी बताया कि आगा मीर सैयद अब्बास हुसैन खोरासानी ने ईरानी दूतावास के डिप्टी चीफ मोहम्मद जावेद हुसैनी से भी मुलाकात कर यह संदेश साझा किया और अपनी पुस्तक में भी इस विषय पर विचार दर्ज किए।
भारत-ईरान संबंध पर जोर

भारत और ईरान के संबंध सदियों पुराने हैं और सांस्कृतिक व धार्मिक स्तर पर दोनों देशों के बीच गहरा जुड़ाव रहा है। यह दौरा उसी परंपरा को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। यह पूरा घटनाक्रम धार्मिक आस्था, ऐतिहासिक परंपरा और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक संबंधों का संगम माना जा रहा है।
