संभल/लखनऊ : यूपी की संभल जामा मस्जिद हिंसा मामले में शाही जामा मस्जिद इंतेजामिया कमेटी के सदर जफर अली एडवोकेट को इलाहाबाद हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने निचली अदालत में चल रही सभी कार्रवाई पर स्टे दे दिया है। न्यायालय की सिंगल बेंच के जस्टिस समीर जैन ने जफर अली की याचिका पर 15 सितंबर को आदेश पारित करते हुए कहा कि अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को होगी। जफर अली ने मीडिया को बताया कि उन्हें कोर्ट से आदेश मिल गया है और कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस-प्रशासन ने झूठा केस लगाकर उन्हें जेल भेजा था। जफर अली ने कहा, “हम न्याय के लिए लड़ाई जारी रखेंगे और प्रयास करेंगे कि केस रद्द कराया जाए।”
जानें क्या है मामला?
संभल जामा मस्जिद विवाद की शुरुआत 19 नवंबर 2024 को हुई, जब हिंदू पक्ष ने चंदौसी कोर्ट में दावा किया कि मस्जिद पहले श्री हरिहर मंदिर थी। इसके बाद पुलिस ने मस्जिद का सर्वे शुरू किया। सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। जिसमें पथराव, फायरिंग और वाहन जलाने की घटनाएँ हुईं। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में अब तक 96 आरोपी जेल जा चुके हैं और 2750 अज्ञात के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क और कई अन्य नेताओं के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए थे।
10 अक्टूबर अगली सुनवाई
हाई कोर्ट का स्टे आदेश निचली अदालत की कार्रवाई रोकते हुए अगले चरण की सुनवाई के लिए 10 अक्टूबर की तारीख तय कर चुका है। जफर अली और उनकी टीम इसे न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बता रही है। वहीं पुलिस और प्रशासन मामले की जांच जारी रखे हुए हैं। जफर अली को मुकदमा अपराध संख्या 335/24 में जेल भेजा गया था। 1 अगस्त को जमानत मिलने के बाद 131 दिन जेल में रहने के पश्चात उन्हें रिहा किया गया।
