बरेली/शाहजहांपुर: शाहजहांपुर के पत्रकार रमाशंकर दीक्षित की ओर से दायर याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम रुख अपनाया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता डॉ. गजेन्द्र सिंह यादव ने पक्ष रखा। पत्रकार ने कोर्ट को बताया कि उन पर ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ झूठा यौन शोषण का आरोप लगाने का दबाव बनाया गया और मना करने पर उन्हें व उनके परिवार को लगातार धमकियां दी गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से रिपोर्ट मांगी है, आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष पांडेय को याचिका में पक्षकार बनाने का आदेश दिया है और संबंधित पुलिस अधिकारियों तक आदेश 24 घंटे में पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
पत्रकार ने हाईकोर्ट में क्या आरोप लगाए
शाहजहांपुर निवासी पत्रकार रमाशंकर दीक्षित ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर रिट याचिका में कहा है कि 18 फरवरी 2026 को तीन अज्ञात लोग उनसे मिले और खुद को उनके दिवंगत पिता का परिचित बताया। याचिका के मुताबिक, उन लोगों ने पहले उन्हें पैसों का लालच दिया और फिर मोबाइल पर आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष पांडेय से बात कराई। आरोप है कि आशुतोष ने पत्रकार पर दबाव बनाया कि वह शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर उनकी दो नाबालिग बेटियों के यौन शोषण का झूठा आरोप लगाएं। पत्रकार ने जब इससे इनकार किया तो उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं।
घर की रेकी, पीछा करने और पुलिस पर दबाव बनाने के आरोप
याचिका में कहा गया है कि 22 फरवरी को कुछ लोग पत्रकार के घर तक पहुंचे और वहां रेकी कर चले गए। इसके बाद 27 फरवरी को काली स्कॉर्पियो से आए कुछ लोगों ने लाल इमली रोड पर फिर धमकाया। पत्रकार का आरोप है कि उन्होंने 7 मार्च 2026 को इस पूरे मामले की शिकायत कई अधिकारियों से की थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि बाद में सुरक्षा के लिए घर पर तैनात किए गए कुछ पुलिसकर्मियों ने भी कथित तौर पर पत्रकार पर अपना बयान बदलने का दबाव बनाया। पत्रकार ने इस संबंध में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को ई-मेल के जरिए भी शिकायत भेजी थी। इतना ही नहीं, याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि 15 अप्रैल 2026 को सर्किल ऑफिसर सिटी और एसपी सिटी शाहजहांपुर भी पुलिस बल के साथ उनके घर पहुंचे और उन पर बयान बदलने का दबाव बनाया गया।
हाईकोर्ट ने क्या-क्या आदेश दिए?
मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की पीठ ने आज दाखिल पूरक शपथपत्र को रिकॉर्ड पर लेने का आदेश दिया और कार्यालय को उसे नंबर देने के निर्देश दिए। कोर्ट ने आशुतोष ब्रह्मचारी उर्फ आशुतोष पांडेय को, पूरा नाम-पता और आवश्यक विवरण के साथ, इस याचिका में पक्षकार के रूप में शामिल करने को कहा है। राज्य सरकार की ओर से पेश स्थायी अधिवक्ता को एक सप्ताह के भीतर इस मामले में निर्देश/रिपोर्ट लेने को कहा गया है। अदालत ने अगली सुनवाई 16 जुलाई 2026 तय की है और मामले को फ्रेश केस के रूप में सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।
24 घंटे में बड़े पुलिस अफसरों तक आदेश पहुंचाने का निर्देश, सुरक्षा बना बड़ा मुद्दा
हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार (कम्प्लायंस) को निर्देश दिया है कि आदेश की प्रति 24 घंटे के भीतर बरेली जोन के आईजी, शाहजहांपुर के एसपी और थाना सदर बाजार के एसएचओ तक पहुंचाई जाए। यह आदेश बरेली और शाहजहांपुर के सीजेएम के माध्यम से भेजा जाएगा। याचिका में पत्रकार ने कहा है कि उनकी दो नाबालिग बेटियां हैं और पूरे परिवार की सुरक्षा खतरे में है। ऐसे में उन्होंने कोर्ट से अपने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की मांग की है।
