लखनऊ: उत्तर प्रदेश भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर अब विराम लगता नजर आ रहा है। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी के नाम पर लगभग अंतिम मुहर लगा दी है। सूत्रों के अनुसार, नाम फाइनल हो चुका है और अब सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है। प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति भी शामिल थीं, लेकिन अंततः पार्टी नेतृत्व ने पंकज चौधरी पर भरोसा जताया है।
इसी राजनीतिक हलचल के बीच गुरुवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के अचानक लखनऊ स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचने से सियासी गलियारों में चर्चा तेज हो गई। उनके अचानक आगमन से यह कयास लगाए जाने लगे कि प्रदेश अध्यक्ष पद को लेकर कोई नया मोड़ आ सकता है। मीडिया ने जब उनसे नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर सवाल किया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह “संगठन पर्व” के कार्यक्रम में शामिल होने आई हैं और उन्हें किसी पद की अपेक्षा नहीं है। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए यह भी कहा कि संगठन जो निर्णय करेगा, वह सभी के सामने आ ही जाएगा।
गौरतलब है कि पंकज चौधरी के नाम पर सहमति बनने से पहले साध्वी निरंजन ज्योति को प्रदेश अध्यक्ष पद की एक मजबूत दावेदार माना जा रहा था। उन्होंने हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात भी की थी। इसके बाद राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि पार्टी नेतृत्व एक साथ कई समीकरण साधने की रणनीति पर काम कर रहा है। माना जा रहा था कि यदि साध्वी को जिम्मेदारी दी जाती है तो इससे महिला वोट बैंक, पिछड़ा वर्ग और निषाद समाज को साधने में भाजपा को लाभ मिल सकता है।
हालांकि, गुरुवार को अचानक पंकज चौधरी के नाम को लेकर स्थिति साफ होती दिखी। सूत्रों का कहना है कि चौधरी थोड़ी देर में लखनऊ पहुंचकर भाजपा प्रदेश कार्यालय में नामांकन दाखिल करेंगे। पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को एक बड़े राजनीतिक आयोजन के रूप में पेश करने की तैयारी में है। प्रदेश भाजपा कार्यालय को फूलों से सजाया गया है और संगठन स्तर पर पूरी सक्रियता देखी जा रही है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव को पार्टी एक मेगा इवेंट के रूप में आयोजित करने जा रही है। रविवार को लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में मतदान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल द्वारा नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम की औपचारिक घोषणा किए जाने की संभावना है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि यूपी भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति 15 जनवरी 2025 को प्रस्तावित थी, लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव, यूपी उपचुनाव और बाद में बिहार चुनावों के चलते यह प्रक्रिया लगातार टलती रही। पार्टी के भीतर यह पद केवल प्रदेश स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद अहम माना जाता है। उत्तर प्रदेश भाजपा का अध्यक्ष संगठन और चुनावी रणनीति दोनों के लिहाज से केंद्र की राजनीति को भी प्रभावित करता है।
