पूर्व न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह बोले-मंडल कमीशन की सभी अनुशंसाएं लागू किए बिना सामाजिक न्याय अधूरा
लखनऊ : सामाजिक चेतना फाउंडेशन न्यास ने यूपी प्रेस क्लब में बी.पी. मंडल की जयंती के अवसर पर “सामाजिक न्याय में वोट के अधिकार की भूमिका” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति वीरेंद्र सिंह ने कहा कि “सामाजिक न्याय की संकल्पना तब तक धरातल पर पूरी नहीं उतर सकती, जब तक मंडल कमीशन की सभी 40 अनुशंसाओं को लागू नहीं किया जाता। अभी तक केवल दो लागू हैं, शेष 38 लंबित हैं”
सामाजिक न्याय के मार्ग में जात-पात बड़ी बाधा

पूर्व जनपद न्यायाधीश बी.डी. नकवी ने कहा कि जात-पात, ऊंच-नीच और भेदभाव सामाजिक न्याय के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा हैं। उन्होंने यह नमन करते हुए कहा कि उनकी रिपोर्ट की सभी सिफारिशों को लागू करना ही पिछड़े वर्गों के कल्याण का रास्ता है। प्रो. राजेंद्र वर्मा ने कहा कि उच्च शिक्षा में आज भी ओबीसी प्रोफेसरों की संख्या नगण्य है, जब तक शिक्षा और न्यायपालिका में पिछड़े वर्ग का उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा, तब तक सामाजिक न्याय अधूरा रहेगा।
सामाजिक बुराइयां दूर करने का संकल्प
इस दौरान संगोष्ठी में सामाजिक बुराइयां दूर करने का संकल्प लिया गया। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आई.पी. सिंह, राजेश श्रीवास्तव, रामबाबू, संजय कुमार और लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर मुनेश कुमार समेत कई वक्ताओं ने संगोष्ठी को संबोधित किया। कार्यक्रम के अंत में न्यास के सचिव एडवोकेट महेंद्र मंडल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
