नई दिल्ली : देश की सर्वोच्च अदालत ने पेन्नैयार नदी जल विवाद को लेकर केंद्र सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से चले आ रहे इस अंतर-राज्यीय जल विवाद के समाधान के लिए एक महीने के भीतर जल विवाद ट्रिब्यूनल का गठन किया जाए। यह मामला पेन्नैयार नदी के पानी के बंटवारे से जुड़ा है, जिसे लेकर दोनों राज्यों के बीच लगातार विवाद बना हुआ है। तमिलनाडु सरकार ने वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि कर्नाटक पेन्नैयार नदी पर चेक डैम और पानी मोड़ने की संरचनाएं बना रहा है। तमिलनाडु का कहना है कि इन निर्माण कार्यों के कारण उसके हिस्से में आने वाला पानी प्रभावित हो रहा है।
सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार ने दलील दी कि अंतर-राज्यीय नदियों का जल किसी एक राज्य की निजी संपत्ति नहीं होता, बल्कि यह एक राष्ट्रीय संपदा है। ऐसे में कोई भी राज्य अपनी मर्जी से फैसले लेकर दूसरे राज्य के अधिकारों का हनन नहीं कर सकता। तमिलनाडु ने अदालत से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अब और देरी नहीं की जा सकती। अदालत ने निर्देश दिया कि इस जल विवाद को लेकर आधिकारिक गजट में नोटिफिकेशन जारी किया जाए और एक महीने के भीतर ट्रिब्यूनल का गठन सुनिश्चित किया जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रिब्यूनल के गठन के बाद मामले की नियमित सुनवाई शुरू होगी, जिसमें दोनों राज्यों के तर्क, सबूत और रिपोर्ट्स पेश की जाएंगी।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रिब्यूनल की प्रक्रिया पूरी होने और अंतिम निर्णय आने में समय लग सकता है। वहीं इस मामले पर शीर्ष अदालत का विस्तृत और लिखित फैसला अभी आना बाकी है। ट्रिब्यूनल के गठन के बाद वह तमिलनाडु और कर्नाटक, दोनों राज्यों की बात सुनेगा और पेन्नैयार नदी में उपलब्ध जल संसाधनों का आकलन करेगा। इसके आधार पर ट्रिब्यूनल वैज्ञानिक और कानूनी दृष्टिकोण से यह तय करेगा कि किस राज्य को कितना पानी मिलेगा, किस अवधि में और किन शर्तों के तहत पानी का बंटवारा किया जाएगा।
