नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को तमिलनाडु सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कर्नाटक के मेकेदातु संतुलन जलाशय परियोजना पर रोक लगाने की मांग की गई थी। अदालत ने इसे इस समय ‘असामयिक’ बताया क्योंकि केवल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की अनुमति दी गई है।
मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि अंतिम फैसला DPR तैयार होने और विशेषज्ञ समितियों की राय आने के बाद ही लिया जाएगा। अदालत ने याद दिलाया कि 25 अगस्त 2023 के अपने आदेश में भी कहा गया था कि तकनीकी मामलों पर विशेषज्ञों को ही निर्णय देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि कर्नाटक को तमिलनाडु को आवश्यक जल छोड़ना होगा, अन्यथा अदालत की अवमानना का जोखिम रहेगा।
मेकेदातु परियोजना कर्नाटक और तमिलनाडु की सीमा के पास, कनकपुरा (बंगलूरू दक्षिण) क्षेत्र में प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य कावेरी नदी पर जल संचयन और पेयजल आपूर्ति करना है। तमिलनाडु का दावा है कि इससे राज्य को मिलने वाला पानी प्रभावित होगा।
इस फैसले के साथ कर्नाटक को फिलहाल राहत मिली है, जबकि तमिलनाडु को अपनी आपत्तियां विशेषज्ञ समितियों के सामने रखनी होंगी।
