नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि एसआईआर कराना चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि मुक्त और निष्पक्ष चुनाव के लिए मतदाता सूची का शुद्ध और पारदर्शी होना जरूरी है। अदालत ने साफ कहा कि एसआईआर प्रक्रिया संवैधानिक है और चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग नहीं किया है।
“मतदाता सूची की जांच चुनाव आयोग का अधिकार”
पीठ ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराने का अधिकार प्राप्त है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह नहीं कहा जा सकता कि चुनाव आयोग ने अपनी वैधानिक सीमाओं से बाहर जाकर काम किया है। अदालत ने यह भी माना कि चुनाव आयोग मतदाता सूची के उद्देश्य से नागरिकता से जुड़े सवालों की जांच कर सकता है, हालांकि किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक घोषित करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के दस्तावेज या पात्रता को लेकर संदेह होता है तो चुनाव आयोग उसे सक्षम प्राधिकारी के पास भेज सकता है।
याचिकाकर्ताओं की दलीलें कोर्ट ने खारिज कीं
एसआईआर के खिलाफ दायर याचिकाओं में दावा किया गया था कि यह प्रक्रिया संविधान और पुराने न्यायिक फैसलों के खिलाफ है। याचिकाकर्ताओं में लोकतांत्रिक सुधार संघ, योगेंद्र यादव, महुआ मोइत्रा, मनोज झा, केसी वेणुगोपाल और सुप्रिया सुले समेत कई प्रमुख नाम शामिल थे। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि जिन लोगों का नाम 2002 या 2003 की मतदाता सूची में नहीं था, उनसे पुराने रिकॉर्ड और पारिवारिक संबंध साबित करने की मांग गरीब, प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले लोगों के लिए मुश्किल पैदा करेगी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि एसआईआर प्रक्रिया कानून के दायरे में है।
चुनाव आयोग बोला- फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए जरूरी अभियान
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत में कहा कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित और शुद्ध बनाए रखने के लिए एसआईआर जरूरी है। आयोग ने बताया कि बिहार से शुरू हुई यह प्रक्रिया बाद में पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों तक बढ़ाई गई। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया कि मतदाता सूची से किसी का नाम हटाने का अंतिम फैसला सक्षम प्राधिकारी द्वारा ही लिया जाएगा। अदालत ने पहले आधार कार्ड को भी एसआईआर प्रक्रिया में शामिल करने के निर्देश दिए थे ताकि अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
