मुख्य चुनाव आयुक्त पर एकतरफा फैसले लेने के आरोप, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहले चुनाव आयोग और संबंधित पक्षों का जवाब देखेंगे
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और निर्वाचन आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर दायर याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने ज्ञानेश कुमार को अंतरिम रूप से पद से हटाने या उनके कामकाज पर रोक लगाने का तत्काल आदेश देने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने मामले में चुनाव आयोग, केंद्र सरकार, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
सीईसी पर एकतरफा फैसले लेने का आरोप
याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि निर्वाचन आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके अधिकारों का इस्तेमाल सामूहिक निर्णय प्रक्रिया के तहत होना चाहिए। आरोप है कि ज्ञानेश कुमार ने कुछ महत्वपूर्ण फैसले अन्य दोनों निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना लिए। याचिकाओं में दावा किया गया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच एसआईआर से जुड़े कई मामलों में दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने आपत्तियां दर्ज की थीं। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने आयोग की निर्णय प्रक्रिया और संबंधित फैसलों की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल रोक लगाने से क्यों किया इनकार?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केवल मीडिया रिपोर्टों या आरोपों के आधार पर इस स्तर पर अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट पहले चुनाव आयोग और केंद्र सरकार समेत संबंधित पक्षों का जवाब और रिकॉर्ड देखना चाहता है। पीठ ने संकेत दिया कि यदि रिकॉर्ड से यह सामने आता है कि निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र से जुड़े कोई फैसले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के विपरीत लिए गए थे, तो अदालत उन फैसलों पर आगे उचित आदेश पारित कर सकती है।
फॉर्म-6 को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या स्पष्ट किया?
सुनवाई के दौरान मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित बदलावों का मुद्दा भी उठा। याचिका में आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान ऑनलाइन व्यवस्था में पूर्वजों की जानकारी और पिछले एसआईआर से संबंधित घोषणाओं जैसी अतिरिक्त जानकारियां मांगी गईं। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 के किसी संशोधित रूप को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद वह देखना चाहेगी कि कथित बदलाव किसने किए।
दोनों निर्वाचन आयुक्तों की आपत्तियों का भी जिक्र
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में उन रिपोर्टों का हवाला दिया गया, जिनमें दावा किया गया था कि दोनों अन्य निर्वाचन आयुक्तों ने एसआईआर से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्ति दर्ज की थी। हालांकि, चुनाव आयोग का पक्ष यह रहा है कि संस्था के भीतर विचारों और टिप्पणियों में अंतर होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और एसआईआर से जुड़े उसके आदेश कानूनी रूप से वैध हैं। आयोग ने पहले यह भी कहा था कि एसआईआर से जुड़े फैसले सामूहिक रूप से लिए गए हैं।
याचिकाओं में क्या-क्या मांगें की गई हैं?
राकेश कुमार सिंह की याचिका में मांग की गई है कि ज्ञानेश कुमार को मामले की अंतिम सुनवाई तक मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्य करने से रोका जाए और निर्वाचन आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित किया जाए। वहीं, अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में कथित तौर पर एकतरफा लिए गए फैसलों को रद्द करने और मामले की जांच की मांग की गई है। याचिका में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की गई है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई अंतरिम कार्रवाई नहीं की है। अब चुनाव आयोग, केंद्र सरकार और संबंधित अधिकारियों के जवाब के बाद अदालत मामले के रिकॉर्ड और निर्णय प्रक्रिया की वैधानिकता पर आगे विचार करेगी। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह है कि जिन फैसलों को लेकर याचिकाओं में आपत्ति उठाई गई है, वे निर्वाचन आयोग की निर्धारित सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और संबंधित कानून के अनुरूप लिए गए थे या नहीं।
