रिजनों से मुलाकात कर दी श्रद्धांजलि, सामाजिक आंदोलनों में साथ काम करने के अनुभव साझा किए; बिलारी के साथियों से अधूरे कार्य पूरे करने की अपील
बिलारी : किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक और संयुक्त किसान मोर्चा की कोर कमेटी के सदस्य डॉ. सुनीलम मंगलवार को दिवंगत सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राकेश रफीक के बिलारी स्थित आवास पहुंचे। यहां उन्होंने उनकी पत्नी डॉ. मीनाक्षी सखी, बेटी झरना और दामाद रक्षित से मुलाकात कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने डॉ. राकेश रफीक के सामाजिक योगदान और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए किए गए संघर्ष को याद किया।
वंचित वर्गों की आवाज बुलंद करने के लिए किया संघर्ष
पत्रकारों से बातचीत में डॉ. सुनीलम ने कहा कि डॉ. राकेश रफीक मार्क्स, गांधी और जयप्रकाश नारायण के विचारों के गंभीर अध्येता थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज के वंचित वर्गों को संबल देने और उनकी आवाज बुलंद करने के लिए समर्पित किया। डॉ. सुनीलम के मुताबिक, राकेश रफीक देश और दुनिया के मुद्दों पर गंभीरता से सोचते थे। इसके साथ ही उन्होंने बिलारी की स्थानीय समस्याओं को हल करने के लिए भी अपना समय, ऊर्जा और संसाधन लगाए।
‘नई तालीम’ और भारतीय भाषाओं पर लिखीं किताबें
डॉ. सुनीलम ने बताया कि डॉ. राकेश रफीक ने गांधीवादी विचारों के आधार पर वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की दिशा में ‘नई तालीम’ नामक पुस्तक लिखी थी। उन्होंने राष्ट्रवाद की अवधारणा, कुछ राजनीतिक दलों द्वारा इसके इस्तेमाल और भारतीय भाषाओं को समृद्ध करने से जुड़े विचारों पर भी लेखन किया। डॉ. सुनीलम ने कहा कि राकेश रफीक का लेखन सामाजिक बदलाव, शिक्षा और भारतीय भाषाओं के महत्व जैसे विषयों पर केंद्रित था।
नर्मदा बचाओ आंदोलन से किसान आंदोलन तक साथ किया काम
डॉ. सुनीलम ने बताया कि डॉ. राकेश रफीक से उनका परिचय करीब 40 वर्ष पुराना था। इस दौरान उन्हें कई सामाजिक और जन आंदोलनों में साथ काम करने का अवसर मिला। उन्होंने बताया कि राकेश रफीक ने मेधा पाटकर के साथ नर्मदा बचाओ आंदोलन, डॉ. बीडी शर्मा के साथ भारत जन आंदोलन, डॉ. बनवारी लाल शर्मा के साथ आजादी बचाओ आंदोलन, अन्ना हजारे के साथ जन लोकपाल आंदोलन और किसान आंदोलन में भागीदारी की थी। उन्होंने युवा भारत संगठन के निर्माण में भी भूमिका निभाई थी।
‘राकेश रफीक का निधन नागरिक समाज के लिए अपूरणीय क्षति’
डॉ. सुनीलम ने डॉ. राकेश रफीक के निधन को नागरिक समाज और व्यवस्था परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध लोगों के समूह की अपूरणीय क्षति बताया। उन्होंने बिलारी के साथियों से अपील की कि वे राकेश रफीक के अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए अपने प्रयास जारी रखें। उन्होंने कहा कि बिलारी के साथी जब भी किसी आंदोलन में सहयोग के लिए उन्हें याद करेंगे, वह समय देने का प्रयास करेंगे। डॉ. सुनीलम की इस मुलाकात के दौरान डॉ. राकेश रफीक के सामाजिक जीवन, विचारों और जन आंदोलनों में उनके योगदान को याद किया गया।
