दिल्ली : देश की राजधानी और आसपास के इलाकों में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने बेहतर एयर क्वालिटी सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली-एनसीआर से सभी कोयला-आधारित उद्योगों को बाहर शिफ्ट करने के प्रस्ताव पर केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से जवाब तलब किया है। इसके साथ ही वायु प्रदूषण से जुड़े कई अहम मुद्दों पर दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि स्वच्छ हवा नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसके लिए ठोस, दीर्घकालिक और प्रभावी कदम उठाना जरूरी है।
सीएक्यूएम के सुझावों पर 12 मार्च को होगी सुनवाई
नेशनल कैपिटल रीजन में वायु प्रदूषण से निपटने को लेकर Commission for Air Quality Management (CAQM) के सुझावों पर अदालत ने गंभीरता दिखाई है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि 12 मार्च को विशेष रूप से वाहनों से होने वाले प्रदूषण के मुद्दे की जांच की जाएगी। इसके साथ ही अदालत ने निर्माण और तोड़फोड़ के दौरान उड़ने वाली धूल को रोकने के लिए सीएक्यूएम द्वारा सुझाए गए उपायों पर सभी स्टेकहोल्डर्स से जवाब मांगा है।
300 किमी के दायरे में कोयला आधारित उद्योगों पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय से उन सुझावों पर जवाब मांगा है, जिनमें दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में कोई नया कोयला-आधारित थर्मल पावर प्लांट न लगाने की बात कही गई है। अदालत ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सरकारों को निर्देश दिया है कि वे एनसीआर में स्थित कोयला-आधारित इंडस्ट्रीज और अन्य संबंधित पक्षों से सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित करने के लिए पब्लिक नोटिस जारी करें और उसके आधार पर एक्शन टेकन प्लान दाखिल करें।
कोयला इंडस्ट्री खत्म करने और वैकल्पिक ईंधन पर जोर
अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि एनसीआर में कोयला-आधारित इंडस्ट्रीज को चरणबद्ध तरीके से खत्म करने के लिए संबंधित मंत्रालय संयुक्त प्रस्ताव दाखिल करें। इस प्रस्ताव में पहले उद्योगों की पहचान और फिर उनके लिए वैकल्पिक ईंधन स्रोत तय करने की योजना शामिल होगी। साथ ही अदालत ने दिल्ली सरकार को भी सीएक्यूएम द्वारा सुझाए गए लॉन्ग-टर्म सॉल्यूशन को लागू करने के लिए एक विस्तृत एक्शन प्लान दाखिल करने का आदेश दिया है। बेंच ने स्पष्ट किया कि वाहनों से होने वाले प्रदूषण की भी गहराई से जांच जरूरी है। अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 12 मार्च को होगी।
