महोबा : कभी-कभी इंसानियत की एक छोटी-सी पहल भी बड़ी खुशी बन जाती है। उत्तर प्रदेश के महोबा में उपकारागार के जेलर पीके मिश्रा ने ऐसा ही एक मानवीय उदाहरण पेश किया, जिसकी चर्चा अब पूरे जिले में हो रही है। हत्या के मामले में जेल में बंद एक महिला जब मां बनी, तो जेल प्रशासन ने नवजात बेटी का ऐसा स्वागत किया, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं।
जनपद मुख्यालय स्थित उपकारागार में हमीरपुर की रहने वाली सीमा और उसका पति लोकेश हत्या के मामले में निरुद्ध हैं। गर्भवती होने के चलते सीमा को लगभग सात महीने पहले मई में जेल भेजा गया था। 26 जनवरी की रात अचानक प्रसव पीड़ा होने पर जेल प्रशासन ने तुरंत उसे जिला महिला अस्पताल में भर्ती कराया। अगले दिन 27 जनवरी की सुबह करीब आठ बजे सीमा ने एक बेटी को जन्म दिया।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जेलर पीके मिश्रा के निर्देश पर जच्चा-बच्चा को लाने पहुंची जेल एंबुलेंस को फूलों और गुब्बारों से सजाया गया। अस्पताल से जेल तक ढोल बजवाकर नवजात बेटी का भव्य स्वागत किया गया। जेल परिसर पहुंचने पर सुरक्षा में तैनात कर्मियों ने भी बच्ची पर न्यौछावर कर अपना स्नेह जताया।
जेलर पीके मिश्रा ने बताया कि वह खुद दो बेटियों के पिता हैं, इसलिए उन्होंने इस बेटी के जन्म को खास और यादगार बनाने की कोशिश की। नवजात के लिए मच्छरदानी, मुलायम कंबल और जरूरी सामान की व्यवस्था की गई है। जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। आने वाले दिनों में नवजात का छठी कार्यक्रम और नामकरण भी किया जाएगा। इस खुशी के मौके पर उपकारागार को फूलों और गुब्बारों से सजाया गया और सभी बंदियों में मिठाई भी बांटी गई। नवजात बेटी का यह अनोखा स्वागत देखकर पिता लोकेश, दादा और अन्य बंदियों की आंखें खुशी से भर आईं। इंसानियत की इस मिसाल की सराहना अब जिले भर में हो रही है।
