लखनऊ : उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है, जो राज्य ही नहीं बल्कि देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। इंग्लैंड की विश्वविख्यात हथियार निर्माता कंपनी वेब्ले एंड सियाल अब लखनऊ नोड में अत्याधुनिक गोला-बारूद निर्माण इकाई स्थापित करने जा रही है। इस परियोजना को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।
कंपनी के चेयरमैन जॉन ब्राइड और निदेशक मनिंदर सियाल के मुताबिक, इस यूनिट को देश की सबसे बड़ी एम्युनिशन उत्पादन इकाइयों में शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है। पहले चरण में करीब 100 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है, जिसे अगले तीन वर्षों में बढ़ाकर 300 करोड़ रुपये तक किया जाएगा। यह निवेश न केवल औद्योगिक विकास को गति देगा बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।
इस अत्याधुनिक प्लांट में 9×19 मिमी, 5.56×45 मिमी, 7.62×39 मिमी, 7.62×51 मिमी और 12.7 मिमी जैसे विभिन्न कैलिबर के रक्षा-ग्रेड गोला-बारूद का उत्पादन किया जाएगा। कंपनी का लक्ष्य है कि वर्ष 2027 तक उत्पादन पूरी तरह शुरू कर दिया जाए, जिससे भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और अधिकृत सुरक्षा एजेंसियों को घरेलू स्तर पर ही उच्च गुणवत्ता का एम्युनिशन उपलब्ध कराया जा सके।
इस परियोजना की खास बात यह है कि यह केवल गोला-बारूद निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें प्राइमर और अन्य जरूरी घटकों का भी उत्पादन किया जाएगा। यानी कंपनी पूरी उत्पादन प्रक्रिया को एक ही स्थान पर संचालित करेगी, जिसे एंड-टू-एंड मैन्युफैक्चरिंग कहा जाता है। इससे उत्पादन की लागत कम होगी और आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत बनेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परियोजनाएं भारत की रक्षा जरूरतों को पूरा करने में आत्मनिर्भरता बढ़ाएंगी और आयात पर निर्भरता को कम करेंगी। साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसे अभियानों को भी मजबूती मिलेगी।
गौरतलब है कि वेब्ले एंड सियाल की एक यूनिट पहले से ही हरदोई के संडीला में संचालित हो रही है, जहां पिस्टल, रिवॉल्वर, राइफल और शॉटगन का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा, कंपनी वहां एक नई एयरगन फैक्ट्री भी स्थापित कर रही है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाली एयरगन तैयार की जाएंगी। कुल मिलाकर, लखनऊ में प्रस्तावित यह नई यूनिट न केवल उत्तर प्रदेश को रक्षा उत्पादन का प्रमुख केंद्र बनाने में मदद करेगी, बल्कि देश की सुरक्षा व्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।
