कोलकाता : तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। चुनाव परिणामों ने जहां पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को हिला दिया है, वहीं अब नई सरकार के गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) इस समय सत्ता के बेहद करीब नजर आ रही है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर दिया।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने जानकारी देते हुए बताया कि टीवीके प्रमुख विजय ने उनसे समर्थन मांगा था, जिसके बाद पार्टी ने सशर्त समर्थन देने का फैसला लिया। कुछ ही देर बाद कांग्रेस की ओर से इस समर्थन का आधिकारिक एलान भी कर दिया गया। कांग्रेस का कहना है कि वह राज्य में एक धर्मनिरपेक्ष और संविधान की भावना के अनुरूप चलने वाली सरकार चाहती है और इसी उद्देश्य से उसने यह कदम उठाया है।
हालांकि कांग्रेस के इस फैसले ने द्रमुक को पूरी तरह से नाराज कर दिया है। द्रमुक, जो लंबे समय से कांग्रेस की सहयोगी रही है, इस अचानक बदले रुख को विश्वासघात मान रही है। द्रमुक प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह सिर्फ द्रमुक के साथ ही नहीं बल्कि तमिलनाडु की जनता के साथ भी धोखा है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह खत्म भी नहीं हुई थी और कांग्रेस ने इतनी जल्दी अपना नया राजनीतिक रास्ता चुन लिया।
अन्नादुरई ने तंज कसते हुए कहा कि जीत के प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर की स्याही सूखने से पहले ही कांग्रेस ने नया गठबंधन कर लिया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि द्रमुक ने हर मौके पर कांग्रेस का साथ दिया, यहां तक कि एमके स्टालिन ने राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में सबसे पहले आगे बढ़ाया था। इसके बावजूद कांग्रेस का यह कदम बेहद निराशाजनक है। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस के समर्थन से टीवीके सरकार बना पाएगी। तमिलनाडु विधानसभा की कुल 234 सीटों में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। चुनाव में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं, जबकि कांग्रेस के पास 5 विधायक हैं। इस तरह दोनों का कुल आंकड़ा 113 तक पहुंचता है, जो बहुमत से अभी भी पांच सीट कम है।
इस स्थिति में टीवीके के सामने अब बहुमत साबित करने की चुनौती है। इसके लिए उसे अन्य दलों या निर्दलीय विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि अन्नाद्रमुक टीवीके को समर्थन दे सकती है। इसके अलावा द्रमुक की ओर से भी यह दावा किया गया है कि अन्नाद्रमुक के कुछ विधायक टूटकर टीवीके के साथ जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो टीवीके के लिए बहुमत का आंकड़ा हासिल करना आसान हो जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम के बीच टीवीके प्रमुख विजय भी सक्रिय हो गए हैं। वे आज राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात करने वाले हैं। बताया जा रहा है कि वे सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। इस संबंध में विजय पहले ही राज्यपाल को पत्र लिख चुके हैं। इस मुलाकात के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो विजय सात मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। हालांकि यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि वे बहुमत साबित करने के लिए जरूरी समर्थन जुटा पाते हैं या नहीं। तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम एक बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। जहां एक तरफ पारंपरिक दलों के बीच गठबंधन टूटते नजर आ रहे हैं, वहीं नई राजनीतिक ताकतें उभरकर सामने आ रही हैं। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि राज्य की सत्ता किसके हाथ में जाती है, लेकिन फिलहाल राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमाया हुआ है और हर किसी की नजर अब अगले कदम पर टिकी हुई है।
