एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने खारिज की अपील, निचली अदालत के फैसले को माना सही
रामपुर: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आजम खान को चुनावी भाषण मामले में राहत नहीं मिली है। लोकसभा चुनाव-2019 के दौरान चुनावी सभा में अधिकारियों पर विवादित टिप्पणी करने के मामले में एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) ने उनकी अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दो वर्ष की सजा और जुर्माने के आदेश को बरकरार रखा है।
मामला वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान थाना भोट क्षेत्र के गांव मनकरा में आयोजित चुनावी जनसभा का है। आरोप है कि जनसभा को संबोधित करते हुए आजम खान ने मंच से अधिकारियों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। प्रशासन ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई की थी।
इस मामले में तत्कालीन उप जिलाधिकारी घनश्याम त्रिपाठी की ओर से भोट थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में चली।
मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद 16 मई 2026 को निचली अदालत ने आजम खान को दोषी करार देते हुए विभिन्न धाराओं में दो-दो वर्ष के कारावास तथा प्रत्येक धारा में पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी।
निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए आजम खान ने एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (सेशन ट्रायल) में अपील दायर की थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शनिवार को सुनाए गए निर्णय में अदालत ने निचली अदालत के आदेश को सही ठहराते हुए अपील खारिज कर दी।
सेशन कोर्ट के फैसले के बाद अब आजम खान पर निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दो वर्ष की सजा और जुर्माने का आदेश यथावत प्रभावी रहेगा। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से शासकीय अधिवक्ता सीमा राणा ने पैरवी की।