गांधी भवन में जनांदोलनों की अखिल भारतीय बैठक आयोजित, वक्ताओं ने मार्क्स, गांधी और जयप्रकाश नारायण के विचारों के साथ चार दशक तक संघर्ष करने वाला साथी बताया
लखनऊ: जनांदोलनों की अखिल भारतीय बैठक में मुरादाबाद जिले के बिलारी निवासी क्रांतिकारी, आंदोलनकारी और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. राकेश रफीक को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। लखनऊ के गांधी भवन में आयोजित कार्यक्रम में देश के 15 राज्यों से आए करीब 250 आंदोलनकारियों ने उनके सामाजिक और वैचारिक योगदान को याद किया। वक्ताओं ने उन्हें मार्क्स, महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण के विचारों को आगे बढ़ाने वाला संघर्षशील साथी बताया।
चार दशक के संघर्षों और योगदान को किया याद
श्रद्धांजलि सभा में शामिल आंदोलनकारियों ने डॉ. राकेश रफीक के साथ बीते करीब 40 वर्षों के संघर्षों से जुड़े संस्मरण साझा किए। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने सामाजिक बदलाव और व्यवस्था परिवर्तन के लिए लगातार काम किया तथा युवाओं को वैचारिक रूप से तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभा में आंगनबाड़ी यूनियन की डॉ. वीणा गुप्ता, झारखंड के मंथन, बिहार के शाहिद कमाल, वाराणसी की जागृति राही और अनूप श्रमिक, बलिया के राघवेंद्र, लखनऊ के आलोक और योगेंद्र यादव, मऊ के अरविंद मूर्ति तथा यवतमाल के ज्ञानेंद्र सहित विभिन्न जनांदोलनों से जुड़े लोगों ने अपने विचार रखे।
किसान और अन्ना आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी का जिक्र
किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने कहा कि डॉ. राकेश रफीक ने व्यवस्था परिवर्तन के उद्देश्य से चार दशक तक युवाओं को वैचारिक रूप से प्रशिक्षित किया। उन्होंने किसान आंदोलन और अन्ना आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। इसके साथ ही देश के विभिन्न राज्यों में चल रहे आंदोलनों को जमीनी स्तर पर समर्थन भी दिया। डॉ. सुनीलम ने कहा कि डॉ. रफीक उन चुनिंदा सामाजिक कार्यकर्ताओं में शामिल थे, जिनकी वैचारिक स्पष्टता के साथ जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ थी। देशभर के आंदोलनकारियों से उनके व्यक्तिगत संबंध थे। उन्होंने युवा भारत के निर्माण के लिए भी काम किया।
डॉ. मीनाक्षी सखी के साथ साझा जीवन को बताया प्रेरणादायी
श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने डॉ. राकेश रफीक और डॉ. मीनाक्षी सखी के साझा जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों ने जीवनसाथी के रूप में एक आदर्श प्रस्तुत किया और सामाजिक मान्यताओं तथा रूढ़ियों को चुनौती देते हुए अपना जीवन सामाजिक सरोकारों के लिए समर्पित किया।
दो मिनट का मौन रखकर दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के अंत में देशभर से आए आंदोलनकारियों ने दो मिनट का मौन रखकर डॉ. राकेश रफीक को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद पुष्पांजलि अर्पित कर उनके संघर्षों और सामाजिक योगदान को याद किया गया। सभा में शामिल लोगों ने उनके विचारों और जनांदोलनों से जुड़े अनुभवों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई।
