कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने एक साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त पर दिया रिहाई का आदेश, दिल्ली पुलिस ने BNSS की धाराओं के तहत एहतियाती कार्रवाई की बात कही
नई दिल्ली: दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दिपके समेत तीन नेताओं को अदालत से राहत मिली है। रविवार को अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने तीनों को 50-50 हजार रुपये के मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही अगले एक साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने की शर्त रखी गई है।
एक साल तक शांति बनाए रखने की शर्त
अदालत के आदेश के मुताबिक, तीनों नेताओं को निर्धारित अवधि के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखनी होगी। उन्हें ऐसी किसी गतिविधि में शामिल नहीं होने का निर्देश दिया गया है, जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो। वकील रत्ना सिंह ने सामाजिक माध्यम पर पोस्ट साझा कर तीनों नेताओं की रिहाई की जानकारी दी। अदालत की ओर से तय शर्तों के तहत मुचलका भरने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हुआ।
दिल्ली पुलिस ने बताई एहतियाती गिरफ्तारी की वजह
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धाराओं 126 और 170 के तहत एहतियातन हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने बताया कि जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों को दिल्ली कैंट स्थित एसईएम अदालत में पेश किया गया। एक साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने के लिए 50-50 हजार रुपये के मुचलके की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अदालत ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया।
सीजेपी ने सोशल मीडिया पर जताई खुशी
तीनों नेताओं की रिहाई के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने सामाजिक माध्यम पर खुशी जाहिर की। पार्टी की ओर से कहा गया कि आखिरकार दिल्ली पुलिस को अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को रिहा करना पड़ा। पार्टी ने अपने संदेश में लिखा, “कॉकरोच कभी मरते नहीं हैं।” इस टिप्पणी के जरिए सीजेपी ने अपने समर्थकों के बीच उत्साह जाहिर किया।
दिल्ली में कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की खबर
इस बीच राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रही। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कनॉट प्लेस के आउटर सर्किल के पास कुछ प्रदर्शनकारी मौजूद थे। डीडीयू मार्ग से चार और अशोक रोड से दो-तीन लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। सुप्रीम कोर्ट के आसपास भीड़ जुटने से रोकने के लिए पुलिस तैनात रही। भगवान दास रोड पर भी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी बताई गई। हालांकि, इन अलग-अलग स्थानों पर हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान और आगे की कार्रवाई की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
दिल्ली पुलिस के सब-इंस्पेक्टर के इस्तीफे का दावा भ्रामक
इसी बीच सामाजिक माध्यम पर एक वीडियो फिर से प्रसारित किया जा रहा है। वीडियो में एक व्यक्ति खुद को दिल्ली पुलिस का सब-इंस्पेक्टर बताते हुए दावा करता है कि उसने हालिया विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड में वीडियो में बताए गए विवरण से मेल खाने वाला कोई सब-इंस्पेक्टर नहीं मिला है। ऐसे में वीडियो में किया गया दावा असत्यापित और भ्रामक बताया जा रहा है। इस मामले में वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित व्यक्ति की पहचान सामने आना जरूरी है। सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी दावे को आधिकारिक पुष्टि के बिना सच मानने से बचना चाहिए।
रिहाई के बाद भी शर्तों का पालन करना होगा
अदालत के आदेश के तहत तीनों सीजेपी नेताओं को एक साल तक शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखना होगा। वहीं, दिल्ली पुलिस ने अपनी कार्रवाई को एहतियाती कदम बताया है।प्रदर्शनकारियों की हिरासत, सुरक्षा व्यवस्था और कथित इस्तीफे वाले वीडियो को लेकर सामने आई अलग-अलग जानकारियों के बीच आधिकारिक तथ्यों और सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।
