करीब सवा घंटे की देरी से शुरू हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए, दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का भी किया जिक्र
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। करीब सवा घंटे की देरी से शुरू हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने दावा किया कि भारत के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ियां हो रही हैं और उन्होंने इसे अपने पहले के ‘वोट चोरी’ के आरोपों से जोड़ा। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग भी की।
राहुल गांधी बोले- एंटी इन्कंबेंसी से कोई नहीं बचता
राहुल गांधी ने कहा कि भारत में एक मौलिक राजनीतिक बल है, जिसे एंटी इन्कंबेंसी कहा जाता है और समय के साथ यह सरकारों के खिलाफ पैदा होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इंदिरा गांधी बांग्लादेश युद्ध के बाद लोकप्रियता के चरम पर थीं, लेकिन कुछ वर्षों के भीतर उनके खिलाफ भी एंटी इन्कंबेंसी पैदा हो गई थी। उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग राज्यों में भी सरकारों के खिलाफ एंटी इन्कंबेंसी देखी जाती रही है, लेकिन कुछ राज्यों में यह दिखाई नहीं देती। राहुल गांधी ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया से जोड़ते हुए अपने सवाल उठाए।
2024 लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी का आरोप
राहुल गांधी ने दावा किया कि वह बिना आधार के आरोप नहीं लगा रहे हैं और उनके पास अपने दावों के समर्थन में तथ्य हैं। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों में चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियां हुई हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी आरोप लगाए और कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाताओं के वोट की सुरक्षा करना है। हालांकि, ये आरोप राहुल गांधी के राजनीतिक दावे हैं; चुनाव आयोग ने अपनी ओर से आयोग के भीतर अलग-अलग राय और टिप्पणियों को सामान्य संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताया है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है और उनके पास कथित ‘वोट चोरी’ को साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी इस कथित साजिश में शीर्ष स्तर पर शामिल होने का आरोप लगाया। ये आरोप राहुल गांधी के बयान के रूप में हैं और इन पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का किया जिक्र
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने, एसआईआर तथा मतदाता डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल थे।
फॉर्म-6 में बदलाव को लेकर क्या है विवाद?
रिपोर्ट के अनुसार नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़ा एक नया सवाल जोड़ा गया था। इसमें आवेदक से पूछा जा रहा था कि उसका, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में था या नहीं। रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि वैधानिक फॉर्म-6 में बदलाव के लिए संबंधित नियमों में संशोधन आवश्यक है। सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी। बाद में संधू ने इस बदलाव को अनधिकृत और गैरकानूनी बताते हुए इसे हटाने की मांग की थी।
मतदाता डेटा के केंद्रीकरण पर भी उठे सवाल
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने मतदाता सूची के डिजिटल डेटा तक पहुंच और उसके केंद्रीकरण को लेकर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट में बताया गया कि उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि राज्य स्तर के अधिकारियों की मतदाता डेटा तक पहुंच कहीं सीमित तो नहीं की जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने मतदाता डेटा में बदलाव करने की अनुमति और उसके नियंत्रण से जुड़े प्रावधानों को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कीं।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों पर भी आपत्ति
रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल में एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से जुड़े मामलों का भी उल्लेख है। इसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने उन अपीलों की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जिनके जरिए कुछ मतदाताओं के नाम बहाल किए जाने के फैसलों को चुनौती दी गई। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने पूछा था कि चुनाव आयोग की ओर से ऐसी अपील दाखिल करने के लिए किसे अधिकृत किया गया था और इसकी जानकारी आयोग के अन्य सदस्यों को क्यों नहीं दी गई।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
इन रिपोर्टों और विवाद के बीच चुनाव आयोग ने अपने कामकाज को लेकर अपना पक्ष रखा है। आयोग के मुताबिक वह संविधान के तहत काम करने वाली बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है और उसके भीतर लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी राय तथा आंतरिक विचार-विमर्श सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने कहा कि उसकी सभी कार्रवाइयां कानून और आयोग के निर्देशों के अनुसार की जाती हैं। यानी दो चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज की गई आपत्तियों को आयोग की ओर से संस्थागत प्रक्रिया और अलग-अलग विचारों के संदर्भ में देखा गया है।
राहुल गांधी बोले- वोट गया तो व्यवस्था पर असर पड़ेगा
राहुल गांधी ने अपने बयान में वोट, संविधान, कानून और संस्थाओं को एक-दूसरे से जोड़ते हुए कहा कि अगर लोगों के वोट की सुरक्षा नहीं होती है तो लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित होती है।उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाताओं के वोट की रक्षा करना है और वह इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे। उन्होंने दावा किया कि आने वाले महीनों में उनके द्वारा उठाए गए सवालों पर और तथ्य सामने रखे जाएंगे।
एसआईआर को लेकर पहले से जारी है विवाद
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर पहले से ही राजनीतिक और सार्वजनिक बहस चल रही है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक देश के विभिन्न हिस्सों में एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाता नामों की जांच और सूची में बदलाव की प्रक्रिया हुई है। इसी प्रक्रिया से जुड़े कई फैसलों पर चुनाव आयोग के भीतर भी आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई है। ऐसे में राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने चुनाव आयोग के भीतर सामने आई इन आपत्तियों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, चुनावों में ‘वोट चोरी’ या व्यापक धांधली के राहुल गांधी के आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए; उपलब्ध रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियां मुख्य रूप से प्रक्रिया, अधिकार और मतदाता सूची प्रबंधन से संबंधित हैं।

