बरेली : यूपी के बरेली में 26 सितंबर को ‘I Love Muhammad’ पोस्टर विवाद से शुरू हुई हिंसा और उसके बाद हुई पुलिस व प्रशासनिक कार्रवाई अब राज्य मानवाधिकार आयोग के दरवाजे तक पहुँच गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने इस घटना से जुड़ी पुलिस की मुठभेड़, बुलडोजर कार्रवाई, और इंटरनेट निलंबन को लेकर राज्य मानवाधिकार आयोग में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।
जानें क्या है पूरा मामला
26 सितंबर 2025 को बरेली में कानपुर में ‘I Love Muhammad’ पोस्टर लगाने पर कार्रवाई के विरोध में बवाल हो गया था। शुक्रवार की नमाज़ के बाद स्थिति बिगड़ गई। आरोप है कि हिंसक भीड़ ने पुलिस पर हमला किया, पत्थरबाज़ी हुई और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचा। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, “बाहरी तत्वों” को बुलाकर माहौल को भड़काने की कोशिश की गई थी।
शहर में कई दिन तक तनाव बना रहा और इंटरनेट सेवा निलंबित कर दी गई।
पुलिस और प्रशासनिक कार्रवाई
एडवोकेट गजेन्द्र सिंह का कहना है कि घटना के बाद पुलिस ने 80 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें मौलाना तौकीर रजा, डॉ. नफीस खान, नदीम खान, मुनीर इदरीशी, ताजिम जैसे नाम शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि आरोपी ताजिम ने पुलिस पर गोली चलाई, जिसके बाद उसे “मुठभेड़” में गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की अवैध संपत्तियों जैसे रजा पैलेस को गिराया गया। पुलिस ने 50 से अधिक संपत्तियों, 70 दुकानों, एक लग्जरी होटल और तीन बैंक्वेट हॉल की पहचान की है।
मानवाधिकार आयोग में दर्ज शिकायत में आरोप
अधिवक्ता डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने आयोग को दी शिकायत में कई गंभीर बिंदु उठाए हैं। उनका कहना है कि संभावित फर्जी मुठभेड़ ताजिम और अन्य आरोपियों के साथ कथित फर्जी मुठभेड़, अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और न्यायिक सुरक्षा के अधिकार का उल्लंघन हो सकता है। संपत्ति अधिकार का उल्लंघन बिना नोटिस और सुनवाई के बुलडोजर चलाना अनुच्छेद 300A के तहत असंवैधानिक है। इस बवाल के दौरान नागरिक भय में रहे, जिससे उनका मौलिक सुरक्षा अधिकार प्रभावित हुआ। इसके साथ ही इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क का निलंबन नागरिकों के संवाद और सूचना के अधिकार का उल्लंघन है।
अधिवक्ता ने यह की मांगे
अधिवक्ता डॉ. यादव ने राज्य मानवाधिकार आयोग से निम्नलिखित मांगें रखी हैं। उनका कहना है कि घटनाओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। यदि फर्जी मुठभेड़, अवैध गिरफ्तारी, या प्रशासनिक दुरुपयोग सिद्ध होता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।।भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा और संवाद व्यवस्था में सुधार किया जाए। प्रभावित नागरिकों को मुआवजा और न्यायिक सहायता दी जाए। डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि “बरेली हिंसा और उसके बाद की पुलिस कार्रवाई ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हमारी मांग है कि राज्य सरकार निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करे और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करे।”
