नई दिल्ली/गोवा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार की दिवाली भारतीय नौसेना के वीर जवानों के साथ मनाने के लिए गोवा तट पर पहुँचे। उन्होंने कारवार नौसैनिक अड्डे पर आईएनएस विक्रांत का दौरा किया और जवानों से संवाद करते हुए कहा कि “यह दिवाली मेरे लिए विशेष है क्योंकि मैं इसे अपने परिवार यानी आप सबके बीच मना रहा हूं।” सशस्त्र बलों के साथ दिवाली मनाने की यह परंपरा 2014 से लगातार जारी है। प्रधानमंत्री ने जवानों के साथ समय बिताया, उन्हें संबोधित किया और देश की रक्षा में उनके योगदान को नमन किया।
“आईएनएस विक्रांत आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक” – पीएम मोदी
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का दिन अद्भुत है। एक तरफ समुद्र की अनंत लहरें हैं और दूसरी तरफ मां भारती के वीर सपूत। सूर्य की किरणें जैसे जल पर झिलमिलाती हैं, वैसे ही आप सबके साहस से देश जगमगा रहा है।
उन्होंने कहा कि आईएनएस विक्रांत केवल एक युद्धपोत नहीं, बल्कि 21वीं सदी के भारत की परिश्रम, प्रतिभा और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प का जीवंत उदाहरण बताया।
“आप ही मेरा परिवार हैं” सैनिकों से बोले प्रधानमंत्री
मोदी ने भावनात्मक लहजे में कहा कि हर किसी का मन करता है कि वह दिवाली अपने परिवार के बीच मनाए। मेरे भी यही भाव हैं, इसलिए मैं हर बार अपने परिवार यानी सैनिकों के बीच दिवाली मनाने चला आता हूं।”
उन्होंने कहा कि आईएनएस विक्रांत पर बिताई रात का अनुभव शब्दों में बयान करना कठिन है। “आपके गीत, आपकी उमंग, और आपके समर्पण को देखकर मुझे भारतीय सेना की असली ताकत का अहसास हुआ।”
ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र “विक्रांत के नाम ने ही पाकिस्तान को डराया”
प्रधानमंत्री मोदी ने हालिया ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ महीने पहले ही हमने देखा कि विक्रांत नाम ने पाकिस्तान में खौफ की लहर दौड़ा दी थी। युद्ध शुरू होने से पहले ही दुश्मन के हौसले पस्त हो गए थे। यही भारतीय नौसेना की असली ताकत है।
उन्होंने तीनों सेनाओं थल, जल और नभ के बेहतरीन समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत की सैन्य क्षमता का परिचय कराया।
रक्षा उत्पादन तीन गुना बढ़ा हर 40 दिन में एक स्वदेशी युद्धपोत नौसेना में शामिल
पीएम मोदी ने बताया कि पिछले दशक में भारत का रक्षा उत्पादन तीन गुना से अधिक बढ़ा है और अब यह करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है।
“2014 से अब तक नौसेना को 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां दी गई हैं। आज हम हर 40 दिन में एक नया स्वदेशी पोत नौसेना में शामिल कर रहे हैं।”उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस और आकाश जैसी मिसाइलों की ताकत अब पूरी दुनिया मान रही है और कई देश इन्हें खरीदने की इच्छा जता रहे हैं।
भारत बनेगा अग्रणी रक्षा निर्यातक – स्टार्टअप्स निभा रहे अहम भूमिका
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि भारत दुनिया के शीर्ष रक्षा निर्यातकों में शामिल हो। पिछले दशक में हमारे रक्षा निर्यात में 30 गुना वृद्धि हुई है और इसका श्रेय भारतीय स्टार्टअप्स और स्वदेशी रक्षा उद्योगों को जाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया की 66% तेल आपूर्ति और 50% कंटेनर ट्रैफिक हिंद महासागर से गुजरता है, जिसकी सुरक्षा भारतीय नौसेना कर रही है। आपका साहस ही इन लोहे के जहाजों को जीवंत शक्ति देता है
आईएनएस विक्रांत की भव्यता का उल्लेख करते हुए मोदी बोले,
“ये विशाल जहाज, तेज़ रफ्तार विमान और पनडुब्बियां अपने आप में प्रभावशाली हैं, लेकिन इन्हें शक्ति आपके साहस से मिलती है। आपके समर्पण से ये लोहे के ढांचे एक जीवंत, सांस लेती हुई शक्ति बन जाते हैं।”उन्होंने कहा कि नौसेना, वायुसेना और सेना तीनों ही देश की सीमाओं, समुद्रों और आसमान की रक्षा में निरंतर समर्पित हैं।
नक्सलवाद पर प्रहार, “125 से घटकर सिर्फ 11 जिलों में रह गया असर”
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश अब नक्सली आतंक से मुक्ति की कगार पर है। 2014 से पहले 125 जिले नक्सली हिंसा से प्रभावित थे। दस साल की मेहनत के बाद अब यह संख्या घटकर सिर्फ 11 जिलों में रह गई है। जिन इलाकों में कभी स्कूल नहीं बनने दिए जाते थे, अब वहाँ उद्योग और हाईवे बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन सुरक्षाबलों के समर्पण और बलिदान से संभव हुआ है।
“स्वदेशी का मंत्र अब हर कोने में गूंज रहा है”
जीएसटी सुधारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री बोले,आज वे जिले जो कभी आतंक के गढ़ माने जाते थे, अब स्वदेशी का मंत्र गूंजा रहे हैं। जो युवा कभी हथियार थामे रहते थे, वे आज संविधान को माथे से लगाकर गर्व महसूस कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि भारत अब धरती से लेकर अंतरिक्ष तक प्रगति की नई ऊंचाइयां छू रहा है — और इस राष्ट्र निर्माण में हमारे सशस्त्र बलों की भूमिका सर्वोपरि है।
हर साल सशस्त्र बलों के बीच दिवाली मनाने की परंपरा जारी
2014 से प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद नरेंद्र मोदी हर वर्ष सैनिकों के साथ दिवाली मनाते आए हैं —
2014: सियाचिन ग्लेशियर (लद्दाख)
2015: डोगराई युद्ध स्मारक (अमृतसर)
2016: हिमाचल-चीन सीमा क्षेत्र
2017: गुरेज सेक्टर (जम्मू-कश्मीर)
2018: हर्षिल (उत्तराखंड)
2019: राजौरी (जम्मू-कश्मीर)
2020: लोंगेवाला (राजस्थान)
2021: नौशेरा (जम्मू-कश्मीर)
2022: कारगिल
2023: लेपचा (हिमाचल प्रदेश)
2024: सिरक्रीक (गुजरात)
और अब 2025 में प्रधानमंत्री ने आईएनएस विक्रांत पर वीर जवानों के साथ दिवाली मना कर इस परंपरा को और भी गौरवशाली बना दिया।
