इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुआ परवीन कुरैशी की याचिका पर दिया आदेश, कड़ी सुरक्षा के बीच परिवार से एक-एक घंटे मिल सकेंगे दोनों भाई
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल में बंद अली अहमद और उमर अहमद को उनके दिवंगत भाई अबान अहमद की मिट्टी में शामिल होने के लिए पैरोल पर रिहा करने का आदेश दिया है। शुक्रवार को बुआ परवीन कुरैशी की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की पीठ ने यह आदेश जारी किया।
एक-एक घंटे परिवार के साथ रह सकेंगे अली और उमर
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अली अहमद और उमर अहमद अपने दिवंगत भाई को अंतिम श्रद्धांजलि देने के साथ परिवार के सदस्यों से सीमित समय के लिए मुलाकात कर सकेंगे। दोनों को एक-एक घंटे परिवार के साथ समय बिताने की अनुमति दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा व्यवस्था प्रशासन की जिम्मेदारी होगी। मुलाकात के बाद दोनों को सुरक्षित तरीके से संबंधित जेलों में वापस पहुंचाया जाएगा।
झांसी और लखनऊ जेल में बंद हैं दोनों भाई
अली अहमद इस समय झांसी जेल में बंद हैं, जबकि उमर अहमद लखनऊ जेल में बंद हैं। सुनवाई के दौरान दोनों भाइयों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के सामने पेश किया गया। सुनवाई की शुरुआत में झांसी जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में तकनीकी समस्या आने पर अदालत ने नाराजगी जताई। अदालत ने पूछा कि केवल आवाज क्यों आ रही है और वीडियो क्यों दिखाई नहीं दे रहा। इसके बाद तकनीकी समस्या दूर कर सुनवाई आगे बढ़ाई गई।
अली ने भाई को अंतिम विदाई देने की जताई इच्छा
अली अहमद ने अदालत के सामने अपने दिवंगत भाई अबान अहमद को अंतिम विदाई देने और परिवार के साथ कुछ समय बिताने की इच्छा जताई। अदालत ने उनकी प्रार्थना को स्वीकार करते हुए आवश्यक शर्तों के साथ पैरोल मंजूर कर दी। अदालत ने कहा कि यदि दोनों भाई अपने दिवंगत भाई को अंतिम श्रद्धांजलि देना चाहते हैं और परिवार के साथ सीमित समय बिताना चाहते हैं तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। सुरक्षा की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
नमाज अदा करने की भी अनुमति
हाईकोर्ट ने कहा कि जहां आवश्यक हो, दोनों भाई नमाज अदा कर सकते हैं। प्रशासन को इसके लिए भी सभी जरूरी सुरक्षा इंतजाम करने होंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पैरोल की अवधि में दोनों की गतिविधियां न्यायालय द्वारा तय शर्तों के अनुरूप ही रहेंगी।
सड़क हादसे में हुई अबान अहमद की मौत
बताया गया है कि अबान अहमद की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उनका अंतिम संस्कार प्रयागराज के चकिया, खुल्दाबाद स्थित कब्रिस्तान में किया जाना है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अली और उमर पुलिस सुरक्षा के बीच अपने भाई की मिट्टी में शामिल हो सकेंगे।
उमर ने अली से कहा- हिम्मत रखो, कल मुलाकात होगी
सुनवाई के दौरान अली और उमर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक-दूसरे के सामने भी थे। इसी दौरान लखनऊ जेल में बंद उमर अहमद ने अली से कहा, “अली हिम्मत रखो, कल मुलाकात होगी। मीडिया कुछ भी बुलवाए तो बोलना मत।” अदालत ने आठ अगस्त, शनिवार को दोनों को भाई अबान की मिट्टी से पहले या बाद में एक-एक घंटे परिवार के साथ समय बिताने की अनुमति दी है।
सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन की
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पैरोल के दौरान सुरक्षा में किसी भी तरह की चूक नहीं होनी चाहिए। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि अदालत द्वारा निर्धारित सभी शर्तों का पूरी तरह पालन कराया जाए। पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद दोनों को सुरक्षित संबंधित जेलों में वापस पहुंचाने की जिम्मेदारी भी प्रशासन की होगी।
