कभी डीएलएड में दाखिले के लिए होती थी मारामारी, अब 2.39 लाख सीटों के मुकाबले सिर्फ 1.52 लाख आवेदन; छात्र न मिलने से निजी कॉलेजों पर संकट
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में कभी डीएलएड यानी बीटीसी में दाखिले के लिए युवाओं के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा होती थी। मांग बढ़ने के साथ प्रदेश में बड़ी संख्या में निजी कॉलेज भी खुल गए, लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आ रही है। छात्रों की घटती संख्या के कारण निजी डीएलएड कॉलेजों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है। इस साल करीब 25 कॉलेजों ने मान्यता वापस करने के लिए आवेदन किया है।
2.39 लाख सीटों पर आए सिर्फ 1.52 लाख आवेदन
इस बार डीएलएड में दाखिले के लिए आवेदन की अंतिम तारीख एक बार बढ़ाई गई, इसके बावजूद सीटों के मुकाबले आवेदनों की संख्या काफी कम रही। प्रदेश में कुल करीब 2.39 लाख सीटों के मुकाबले सिर्फ 1.52 लाख आवेदन प्राप्त हुए। काउंसलिंग में शामिल होकर कॉलेजों का विकल्प भरने वाले अभ्यर्थियों की संख्या भी घटकर करीब 1.03 लाख रह गई। विभागीय सूत्रों का मानना है कि पसंद का कॉलेज नहीं मिलने पर इनमें से भी कुछ अभ्यर्थी दाखिला नहीं लेंगे।
साल दर साल घट रही आवेदनों की संख्या
डीएलएड में छात्रों की घटती रुचि लगातार देखने को मिल रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल 2.39 लाख सीटों के मुकाबले केवल 1.24 लाख आवेदन आए थे। वर्ष 2024 में करीब 2.33 लाख सीटों के मुकाबले 3.07 लाख आवेदन आए थे, जबकि 2023 में 2.33 लाख सीटों के मुकाबले करीब 3.36 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे। आंकड़े बताते हैं कि कुछ वर्षों में डीएलएड के प्रति युवाओं की रुचि में बड़ा बदलाव आया है।
25 निजी कॉलेजों ने मान्यता वापसी के लिए किया आवेदन
प्रदेश में वर्तमान में 67 सरकारी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट हैं, जहां डीएलएड की पढ़ाई होती है। इसके अलावा करीब 2,974 निजी डीएलएड कॉलेज संचालित हैं। छात्रों की कमी के कारण इस साल करीब 25 निजी कॉलेजों ने मान्यता वापस करने के लिए आवेदन किया है। हालांकि विभागीय अधिकारी इन आवेदनों की जांच के बाद ही कोई निर्णय लेने की बात कह रहे हैं। अधिकारी के मुताबिक पहले यह देखा जाएगा कि कॉलेज ने मान्यता वापसी का प्रस्ताव अपनी निर्धारित समिति से पारित कराकर भेजा है या किसी एक सदस्य अथवा प्रबंधक की ओर से आवेदन किया गया है। परीक्षण के बाद प्रस्ताव निदेशक और फिर शासन को भेजा जाएगा। अंतिम निर्णय शासन स्तर से लिया जाएगा।
डीएलएड से क्यों हो रहा युवाओं का मोहभंग?
सूत्रों के मुताबिक डीएलएड में छात्रों की घटती रुचि के पीछे सबसे बड़ी वजह रोजगार का संकट माना जा रहा है। डीएलएड कक्षा एक से आठ तक शिक्षक बनने के लिए जरूरी शैक्षिक अर्हताओं में शामिल है, लेकिन प्रदेश में बड़ी संख्या में युवाओं के प्रशिक्षण लेने के बावजूद पिछले करीब छह वर्षों से बेसिक शिक्षा विभाग में नई शिक्षक भर्ती नहीं हुई है। लगातार नए कॉलेज खुलने और डीएलएड करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या बढ़ने के बावजूद नौकरी के अवसर सीमित रहने से युवाओं में इस पाठ्यक्रम को लेकर निराशा बढ़ी है।
69 हजार और 68,500 शिक्षक भर्ती का भी असर
पिछले करीब एक दशक में प्रदेश में 69 हजार और 68,500 शिक्षक भर्ती जैसी बड़ी भर्तियां हुई हैं। इन भर्तियों को लेकर भी अलग-अलग समय पर कानूनी विवाद सामने आए। वर्तमान में नई भर्तियों की कमी के कारण डीएलएड करने के बाद नौकरी मिलने की संभावनाओं को लेकर अभ्यर्थियों में असमंजस है। यही वजह है कि युवा अब दूसरे पाठ्यक्रमों और करियर विकल्पों की ओर भी रुख कर रहे हैं।
पिछले सत्र की देरी से भी पड़ा असर
रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले वर्ष न्यायालय में मामला लंबित रहने के कारण डीएलएड में दाखिले की प्रक्रिया दिसंबर तक खिंच गई थी। लंबे समय तक इंतजार के कारण कई अभ्यर्थियों ने दूसरे पाठ्यक्रमों में दाखिला ले लिया। इस साल बीएड के साथ डीएलएड में दाखिले की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन स्नातक अंतिम वर्ष के अभ्यर्थियों को आवेदन का मौका नहीं मिला। कई विश्वविद्यालयों के परीक्षा परिणाम भी समय पर जारी नहीं हुए। इससे डीएलएड के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की संख्या पर भी असर पड़ा।
कॉलेज एसोसिएशन ने बताई दाखिले कम होने की वजह
स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय त्रिवेदी के मुताबिक डीएलएड में दाखिले कम होने की मुख्य वजह छात्रों को भविष्य में रोजगार की स्पष्ट संभावना नहीं दिखना है। उनका कहना है कि डीएलएड का सत्र समय पर शुरू होना चाहिए और परीक्षाएं भी निर्धारित समय पर होनी चाहिए। यदि प्रशिक्षण और भर्ती की प्रक्रिया में बेहतर तालमेल हो तो युवाओं का इस पाठ्यक्रम के प्रति भरोसा फिर बढ़ सकता है।
निजी डीएलएड कॉलेजों के सामने बढ़ा संकट
डीएलएड में लगातार घटते आवेदनों ने प्रदेश के निजी कॉलेजों की चिंता बढ़ा दी है। सीटें खाली रहने और छात्रों की संख्या कम होने से कई संस्थानों के संचालन पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।अब करीब 25 कॉलेजों की ओर से मान्यता वापसी के लिए किए गए आवेदन के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि आने वाले समय में प्रदेश में डीएलएड कॉलेजों की संख्या कितनी रह जाएगी और सरकार युवाओं को प्रशिक्षण के बाद रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाती है।
