पटना: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने सोमवार को भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेताओं द्वारा उनकी पार्टी के प्रत्याशियों को धमकाकर और दबाव डालकर नामांकन वापस कराया जा रहा है। प्रशांत किशोर ने इस संबंध में कुछ तस्वीरें भी साझा की हैं, जिनमें जन सुराज उम्मीदवार केंद्रीय मंत्रियों के साथ नजर आ रहे हैं।
शेखपुरा हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीके ने कहा कि भाजपा की यह छवि बन गई है कि कोई भी जीते, सरकार वही बनाएगी। अब वही भाजपा जन सुराज से डरने लगी है। उन्होंने कहा कि दानापुर, गोपालगंज और ब्रह्मपुर सीटों पर भाजपा नेताओं ने जन सुराज उम्मीदवारों को बरगलाकर नामांकन वापस करवाया है।
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि दानापुर सीट से जन सुराज प्रत्याशी अखिलेश उर्फ़ मुकुल शाह ने नामांकन नहीं किया, जबकि वे पहले टिकट लेकर तैयार थे। भाजपा नेताओं ने कहा था कि उन्हें राजद समर्थकों ने बंधक बना लिया है, लेकिन बाद में वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ देखे गए। एक सामान्य व्यवसायी को देश का गृह मंत्री बुला रहा है, यह चुनावी प्रक्रिया पर सीधा सवाल है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बक्सर के ब्रह्मपुर सीट से जन सुराज प्रत्याशी डॉ. सत्य प्रकाश तिवारी पर भी दबाव डालकर नामांकन वापस कराया गया। पीके ने धर्मेंद्र प्रधान के साथ उनकी तस्वीरें जारी करते हुए कहा, यह पहला मौका है जब चुनाव घोषित होने के बाद कोई केंद्रीय मंत्री किसी प्रत्याशी से इस तरह मिल रहा है।
इसी तरह गोपालगंज के प्रत्याशी डॉ. शशि शेखर सिन्हा का नामांकन भी कथित रूप से दबाव में वापस कराया गया। पीके ने बताया, दो घंटे पहले उन्होंने कहा था कि मैं आपके साथ हूं, लेकिन उसके बाद उन्होंने फोन बंद कर दिया और नामांकन वापस ले लिया।
प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि अब तक जन सुराज के 14 उम्मीदवारों को विभिन्न तरीकों से धमकाया गया या दबाव डाला गया है। इनमें से तीन प्रत्याशियों ने नाम वापस लिया है, जबकि 240 लोग अब भी डटे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि कुम्हरार से उम्मीदवार प्रो. केसी सिन्हा पर भी भारी दबाव बनाया गया, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वहीं, वाल्मीकिनगर सीट से जन सुराज के शिक्षक उम्मीदवार पर स्थानीय प्रशासन दबाव बना रहा है कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ है, इसलिए वे चुनाव नहीं लड़ सकते।
पीके ने चुनाव आयोग से सवाल किया क्या आयोग नहीं देख रहा कि प्रत्याशी को केंद्रीय मंत्रियों के साथ बैठाकर दबाव में लाया जा रहा है? यह लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की आत्मा पर चोट है।
