पीलीभीत: पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मामले में नामजद दो पूर्व एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 198 जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने मंगलवार को इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि जांच अधिकारी को सोमवार देर रात आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए थे। जल्द ही आरोपियों से पूछताछ भी की जाएगी। मामला सदर विधानसभा क्षेत्र-127 की मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान ऑफलाइन प्राप्त आवेदनों के निस्तारण से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि 31 मई से 28 अगस्त के बीच कुल 13,779 ऑफलाइन फॉर्म प्राप्त हुए थे। इनमें से 10,470 आवेदनों को मंजूरी दी गई, जबकि 3,309 आवेदन खारिज कर दिए गए। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यालय में इन प्रविष्टियों से संबंधित आवेदन पत्र और सहायक दस्तावेज नहीं मिले। इसके अलावा अलग-अलग मतदाताओं के मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) नंबर एक जैसे पाए जाने की शिकायतें भी सामने आई थीं।
22 अक्टूबर को दो पूर्व एसडीएम समेत तीन पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी
सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्ण कुमार कश्यप की शिकायत पर 22 अक्टूबर को पीलीभीत कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसमें तत्कालीन एसडीएम मयंक गोस्वामी, हेमंत चौधरी और मतदाता पंजीकरण केंद्र के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार को नामजद किया गया था। निर्वाचन आयोग के निर्देश पर तीनों को निलंबित भी किया जा चुका है। जांच रिपोर्ट की समीक्षा के बाद निर्वाचन आयोग ने 31 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र भेजा था। इसमें प्राथमिकी में बीएनएस की धारा 198 जोड़ने और मामले को अदालत में आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। इससे पहले इस मामले में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 लगाई गई थी। अब आयोग के निर्देश के बाद पुलिस ने अतिरिक्त धारा जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
क्या है बीएनएस की धारा 198, जिसके तहत बढ़ सकती है कार्रवाई
भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 किसी लोक सेवक की ओर से जानबूझकर कानूनी निर्देशों की अवहेलना करने या आधिकारिक कर्तव्य की उपेक्षा करने से संबंधित है, जिससे किसी नागरिक के अधिकारों को नुकसान पहुंचता है। इस धारा को प्राथमिकी में जोड़ने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस तीनों नामजद आरोपियों से पूछताछ करेगी। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं का यह मामला अब और गंभीर होता नजर आ रहा है।
