17 दिसंबर को पेंशन को मिला अधिकार का दर्जा
संजीव मेहरोत्रा
महामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन
हर वर्ष 17 दिसंबर को पेंशनभोगी दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन लाखों सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सम्मान और अधिकारों की याद दिलाता है, जिन्होंने अपने जीवन के सुनहरे वर्ष राष्ट्र और संस्थानों की सेवा में लगाए। यह दिवस विशेष रूप से डी.एस. नकारा को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए मनाया जाता है, जिन्होंने पेंशनभोगियों के अधिकारों की ऐतिहासिक लड़ाई लड़ी। भारत में पेंशन व्यवस्था की नींव 1881 में रॉयल कमीशन ऑन सिविल एस्टैब्लिशमेंट्स के गठन के साथ पड़ी थी। बाद में 1983 से हर साल 17 दिसंबर को पेंशनभोगी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।
पेंशन कोई दया नहीं, अधिकार है

पेंशन से जुड़े अधिकारों को नई दिशा देने वाला फैसला डी.एस. नकारा बनाम भारत संघ मामले में आया। तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश वाई. बी. चंद्रचूड़ ने ऐतिहासिक टिप्पणी करते हुए कहा था कि “पेंशन न तो कोई उपहार है, न ही नियोक्ता की कृपा या अनुग्रह राशि। यह पूर्व में की गई सेवाओं का भुगतान है, और एक सामाजिक कल्याणकारी उपाय है, जो सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सामाजिक-आर्थिक न्याय प्रदान करता है।”इस फैसले ने पेंशन को कानूनी और नैतिक अधिकार के रूप में स्थापित किया।
पेंशन क्या है?
पेंशन वह नियमित आय है, जो किसी व्यक्ति को सेवा या नौकरी के बाद, विशेषकर सेवानिवृत्ति के पश्चात, वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। सरकारी कर्मचारी, सशस्त्र बल और कुछ निजी क्षेत्र के कर्मचारी इसके दायरे में आते हैं। अधिवार्षिक पेंशन (Superannuation Pension) निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु पर, सेवानिवृत्ति पेंशन (Retiring Pension) समय से पहले सेवानिवृत्ति पर, परिवार पेंशन (Family Pension) कर्मचारी की मृत्यु के बाद आश्रितों को, अशक्त पेंशन (Invalid Pension) अक्षमता के कारण सेवा समाप्त होने पर, अनिवार्य सेवानिवृत्ति पेंशन अनिवार्य रिटायरमेंट की स्थिति में अनुकंपा भत्ता- विशेष परिस्थितियों में,असाधारण पेंशन- ड्यूटी के दौरान चोट या बीमारी पर
सामान्य व वित्तीय पेंशन योजनाएँ
अटल पेंशन योजना (APY) असंगठित क्षेत्र के लिए 1000 से 5000 तक सुनिश्चित पेंशन, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) परिभाषित अंशदान आधारित योजना,परिभाषित लाभ बनाम परिभाषित अंशदान, निश्चित पेंशन बनाम बाजार-आधारित रिटर्न
पेंशन की लड़ाई जारी
वर्तमान समय में पुरानी पेंशन बहाली (OPS) की मांग देशभर में तेज हो रही है, तो वहीं दूसरी ओर बैंक यूनियनें पेंशन अपडेशन को लेकर संघर्षरत हैं। हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों ने साफ कर दिया है कि कर्मचारी संगठन अब इस मुद्दे पर पूरी तरह लामबंद हैं। बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा का कहना है कि “यह लड़ाई लंबी है, लेकिन संगठित संघर्ष के बल पर एक दिन जरूर जीती जाएगी।”
