लखनऊ : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का रिजल्ट आ गया है। इसके बाद सोशल मीडिया से लेकर हर कहीं आंकड़ों से लेकर जीत हार पर चर्चा हो रही है। मगर, इस चुनाव के रिजल्ट से साफ हो गया है कि देश के अन्य राज्यों की तरह 243 विधानसभा सीट वाले बिहार में भी मुस्लिम नुमाइंदगी अंतिम दौर में है। हालांकि, समाज के चन्द तथाकथित लोग एआईएमआईएम (ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन) के पांच विधायक की जीत पर काफी खुश हैं, जो सेकुलर दलों पर टिप्पणियां भी कर रहे हैं। हालांकि, बुद्धजीवी मुस्लिम एआईएमआईएम के सहारे मुस्लिम धुव्रीकरण (कत्बियत) यानी Polarisation की सियासत का विरोध भी कर रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर काफी कुछ लिखा ही है। एआईएमआईएम ने 2020 के चुनाव की जीत का रिकॉर्ड कायम रखा है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के अनुसार इस दल ने 2020 के चुनाव में 1.66 वोट लिए थे, जो बढ़कर 1.85 हो गए हैं और 0.19 फीसद वोट की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही 2020 में 525679 मतदाता थे, जो बढ़कर 930504 मतदाता हो गए। मगर, देश की आजादी के बाद बिहार में सबसे कम विधायक रह गए हैं। एआईएमआईएम को मुस्लिम साम्प्रदायिकता की सियासत से भले ही फायदा होता दिख रहा है, लेकिन मुस्लिम सियासत को बड़ा नुकसान हुआ है। क्योंकि, सांप्रदायिकता और ध्रुवीकरण की राजनीति इधर से हो, या खुद को राष्ट्रवादी पार्टियां बताने वाले दलों से, लेकिन नुकसान देश और समाज का ही है। मुल्क की आजादी में सबसे अधिक संपति और कुर्बानियां देने वाला मुस्लिम समाज हमेशा सेकुलर दलों के साथ खड़ा रहा। उसने पहले देश का भला देखा, इसके बाद खुद को। हालांकि, उनको तमाम बार धुव्रीकरण की तरफ लाने की कोशिश की। मगर, वह इंसानियत और सेकुलरिज्म का दामन मजबूती के साथ पकड़े रहे। जिसके चलते समाज का भी अस्तित्व बचा रहा, और देश भी तरक्की करता रहा। मगर, अब समाज के चन्द लोग एक साम्प्रदायिकता का एजेंडा चलाने वाली सियासी पार्टी के ट्रैप में फंसकर एआईएमआईएम के चक्कर में फंस रहे हैं। इसीलिए उनकी नुमाइंदगी लोकसभा से लेकर विधानसभा तक कम होती जा रही है। क्योंकि, धुव्रीकरण में सिर्फ समाज और देश का नुकसान ही है। हालांकि, यूपी के मुस्लिम धुव्रीकरण की सियासत से दूर हैं। यहां भी 2022 विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने 100 प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन 99 की जमानत जब्त हो गई। इसमें से आजमगढ़ की मुबारकपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने वाले अरशद गुड्डू जमाली को सबसे अधिक 36419 वोट मिले थे। वह भी एआईएमआईएम का साथ छोड़कर सपा में आ चुके हैं। यूपी में 450929 वोट मिले थे, जो सिर्फ 0.49 फीसद वोट मिले हैं। अगर, भविष्य में सुधार नहीं किया, तो, नुमाइंदगी को बड़ा नुकसान होगा।
74 साल में सबसे कम मुस्लिम नुमाइंदगी
बिहार का यह चुनाव सिर्फ सत्ता बदलने का चुनाव नहीं था। यह वह चुनाव है, जिसने बिहार की मुस्लिम सियासत का ग्राफ 74 साल में सबसे नीचे ला दिया है। इस चुनाव में NDA ने 202 सीटों के साथ प्रचंड जीत दर्ज की, लेकिन इस बीच मुस्लिम प्रतिनिधित्व रिकॉर्ड स्तर पर घट गया। मुल्क की आजादी के बाद से हमेशा सेक्यूलर दलों के साथ खड़े रहने से नुमाइंदगी थी, लेकिन जैसे-जैसे देश में सांप्रदायिक सियासत बढ़ती गई, और उनकी नुमाइंदगी कम होती चली गई। मगर, इस बार बिहार चुनाव में मुस्लिम नुमाइंदगी सबसे खराब दौर में पहुंच गई। यहां 18 से 20 फीसद मुस्लिम है। जिसके चलते एमएलए की (संख्या) करीब 50 होनी चाहिए। मगर, सिर्फ 11 बची है। इसमें एआईएमआईएम के 5, आरजेडी के 3, कांग्रेस के 2 और जदयू का एक विधायक जीता है। हालांकि, पहले विधानसभा चुनाव 1951- 52 में हुए जिसमें 24 विधायक बने, 1957 में 25, 1962 में 21, 1967 में 16, 1969 में 19, 1972 और 1977 के चुनाव में 25- 25, 1980 में 28, 1985 में 34, 1990 में 20, 1995 में 19, 2000 में 23, 2005 में 16, 2010 में 19, 2015 में 24, 2020 में 19 मुस्लिम विधायक जीते थे, और 2025 में सिर्फ 11 यानी सबसे कम। यह आबादी का सिर्फ 4.5% से भी कम प्रतिनिधित्व है।
यह जीते विधायक
बिहार की अररिया विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर अब्दुल रहमान, किशनगंज से कमरुल होदा, बिस्फी से आरजेडी के आरिफ अहमद, ढाका से फैजल रहमान, रघुनाथपुर से ओसामा साहब, चैनपुर से जेडीयू के मोहम्मद जमा खान और AIMIM से जोकीहाट से मोहम्मद मुर्शीद आलम, बहादुरगंज से मोहम्मद तौसीफ आलम, कोचाधाम से मोहम्मद सरवर आलम, वयसी विधानसभा से गुलाम सरवर और अमौर से प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान जीते हैं।
65 मुस्लिमों को टिकट
बिहार विधानसभा चुनाव में AIMIM ने 25 सीटों पर चुनाव लड़ा। इसमें 23 मुस्लिम को टिकट दिया। महागठबंधन ने 30, इसमें आरजेडी ने 18, कांग्रेस ने 10, सीपीआई माले ने 2, एनडीए की जदयू ने 4, एलजेपी रामविलास पार्टी ने 01, और जनसुराज पार्टी ने 7 मुस्लिमों को टिकट दिया था। इसमें AIMIM के 5
आरजेडी के 3, कांग्रेस के 2, और जदयू का एक मुस्लिम विधायक जीता। हालांकि, बलरामपुर सीट से AIMIM के मोहम्मद अदिल हसन 389 वोट से हार गए। उनको 80,070 वोट मिले। वहीं, LJP(R) की संजिता देवी को 80,459 वोट मिले हैं।
