लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राजनीति में मुस्लिम समाज की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में आज एक बड़ा कदम उठाया गया। बसपा सुप्रीमो मायावती ने बुधवार को लखनऊ में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई, जिसमें प्रदेशभर से मुस्लिम भाईचारा संगठन के मंडल स्तरीय पदाधिकारी शामिल हुए। यह पिछले एक महीने में बसपा का चौथा बड़ा कार्यक्रम है, जो पार्टी की सक्रियता और मिशन 2027 की तैयारियों का संकेत देता है।
बैठक में करीब 450 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें 75 जिला अध्यक्ष, 90 कोऑर्डिनेटर, 36 मुस्लिम भाईचारा कमेटी के अध्यक्ष और बसपा की कोर कमेटी के कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल रहे। खास बात यह रही कि बैठक की पहली पंक्ति में बैठने वाले सभी चेहरे मुस्लिम समाज से जुड़े थे। मायावती ने हाल ही में 25 अक्टूबर को मुस्लिम भाईचारा संगठन के मंडल प्रभारियों के नाम घोषित किए थे और अब उन्हें सीधे संगठनात्मक निर्देश देने का यह पहला मौका है।
गौर करने वाली बात यह भी है कि 2012 से 2017 तक मुस्लिम भाईचारा कमेटी का गठन तो किया गया था, लेकिन मायावती ने कभी इसकी बैठक नहीं की। बसपा के गठन के बाद यह पहला अवसर है जब मुस्लिम भाईचारा कमेटी और मुख्य संगठनात्मक इकाइयों के पदाधिकारी एक साथ किसी मंच पर मौजूद रहे हों और उस बैठक की अध्यक्षता स्वयं मायावती ने की हो। इसे पार्टी के नए सामाजिक समीकरण और रणनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में मायावती के साथ राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल और राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा भी मौजूद रहे। शुरू में यह बैठक केवल मुस्लिम भाईचारा कमेटी के लिए निर्धारित थी, लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया और संगठन की जमीनी पकड़ मजबूत करने के लिए जिला अध्यक्षों को भी शामिल किया गया। माना जा रहा है कि यह बैठक बसपा के मुस्लिम समाज में भरोसा और संवाद बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिससे आने वाले चुनावों में पार्टी को सीधे राजनीतिक लाभ मिल सके।
