बांदा/लखनऊ :एक दिल छू लेने वाली कहानी जो प्रेम, विश्वासघात, संघर्ष और अंत में न्याय की मिसाल बन गई। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़ी-लिखी मॉरीशस की नागरिक जीना सुल्ताना व्यापार के उद्देश्य से 2010 में भारत आई थीं। लेकिन यहां उन्हें धोखे, मारपीट और सामाजिक उपेक्षा का ऐसा घाव मिला, जिसे भरने में उन्हें 16 साल लग गए।
दिल्ली में प्यार, फिर ठगी का शिकार
जीना की मुलाकात दिल्ली में बांदा के एक युवक राहुल गुप्ता से हुई। राहुल ने प्यार और साझेदारी का झांसा देकर जीना से लाखों रुपये हड़प लिए। जब जीना ने अपने पैसे की मांग की, तो राहुल भागकर अपने गृहनगर बांदा लौट गया। जीना भी हार नहीं मानी और बांदा पहुंचकर राहुल से जवाब मांगने गईं। यहां उन्हें दिनदहाड़े पीटा गया। इस हमले के बाद वह अचेत अवस्था में पाई गईं।
एक अधिवक्ता बनीं फरिश्ता
घटना के बाद समाज सेविका व अधिवक्ता डॉ. लक्ष्मी त्रिपाठी ने उन्हें बचाया और इलाज करवाया। उन्होंने जीना को अपने घर में शरण दी और कानूनी लड़ाई लड़ने में मदद की।
16 साल का संघर्ष, लेकिन हार नहीं मानी
जीना किराए के मकान में रहीं थी। सारी जमा पूंजी अदालतों में खत्म हो गई। दो वक्त की रोटी के लिए भी मोहताज हो गईं। फिर भी न्याय की उम्मीद नहीं छोड़ी भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन की संवेदनशीलता के बाद अंततः बांदा प्रशासन, विदेश मंत्रालय और मॉरीशस दूतावास के प्रयासों से जीना की वतन वापसी संभव हो पाई। 50 वर्षीय जीना सुल्ताना को एयरपोर्ट से मॉरीशस के लिए रवाना किया गया। विदा होते समय जीना ने कहा कि “भारत की धरती पर मुझे धोखा मिला, पर यहीं के लोगों से इंसानियत भी मिली।”
