बरेली : इंडियन रेलवे (भारतीय रेल) के इतिहास में एक बेहद खास स्टेशन का नाम दर्ज है। इसका नाम है इज्जतनगर रेलवे स्टेशन। यह अंग्रेजों की तीन पीढ़ियों ने मिलकर बनाया और आगे बढ़ाया। यह कोई सामान्य रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि ब्रिटिश हुकूमत की इंजीनियरिंग और विज़न की विरासत भी है।
यह इतिहास जुड़ा है, स्टेशन के नाम से
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1875 में अंग्रेज अफसर एलेक्जेंडर आईजेट (Alexander Izzet) ने नैनीताल के पहाड़ी इलाके को मैदानी क्षेत्र से जोड़ने के लिए रेलवे लाइन बिछाने की शुरुआत की थी। बरेली से लखनऊ और फिर काठगोदाम तक रेलवे लाइनें उन्होंने तैयार करवाईं। इस काम को आगे उनके बेटे लेफ्टिनेंट कर्नल डब्ल्यू. आर. आईजेट और फिर पोते सर जे. आर. आईजेट नेवी ने जारी रखा।
ब्रिटिश हुकूमत की तीन पीढ़ियों का एक मिशन
गुलाम भारत में बरेली में ब्रिटिश परिवार की तीन पीढ़ियों ने रेलवे के इस महत्वपूर्ण हिस्से पर काम किया। उनकी सेवाओं और योगदान को सम्मान देने के लिए स्टेशन का नाम ‘आईजेट नगर रेलवे स्टेशन’ रखा गया, जो बाद में स्थानीय उच्चारण में बदलकर ‘इज्जतनगर’ हो गया।
जानिए इज्जतनगर का योगदान
भारत के आजाद होने के बाद बरेली के इज़्ज़तनगर में पूर्वोत्तर रेलवे (एनईआर) के इज्जतनगर रेल मंडल मुख्यालय (डिवीजन हेडक्वार्टर) की शुरुआत हुई। यह स्टेशन पूर्वोत्तर रेलवे का एक महत्वपूर्ण मंडलीय रेल मुख्यालय है। यहां से उत्तर भारत के कई पर्वतीय क्षेत्रों को जोड़ा गया, जो पर्यटन और व्यापार के लिए अहम साबित हुआ। आज भी यह स्टेशन न केवल बरेली की पहचान है, बल्कि भारत के रेलवे इतिहास में एक गौरवशाली अध्याय भी है।
