पीलीभीत : पूरनपुर क्षेत्र में बहने वाली गोमती नदी को पुनर्जीवित करने की दिशा में प्रशासन और समाज दोनों ने मिलकर एक अहम पहल शुरू की है। लंबे समय से सूखती और सिकुड़ती जा रही इस नदी को फिर से अविरल धारा में लाने के लिए अब जमीनी स्तर पर तेज़ी से काम हो रहा है। इस अभियान को लेकर स्थानीय लोगों में भी उत्साह और उम्मीद साफ दिखाई दे रही है।
इस जनअभियान की शुरुआत सामाजिक संस्था “नेकी की दीवार” द्वारा की गई, जिसने गोमती के उद्गम स्थल पर स्वच्छता और जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया। अभियान का शुभारंभ क्षेत्रीय विधायक बाबूराम पासवान और जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान डीएम ने खुद श्रमदान कर लोगों को जागरूक करने का संदेश दिया और साफ-सफाई के कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाई।
अभियान के तहत सबसे पहले गोमती नदी के उद्गम स्थल की सफाई का कार्य पूरा किया गया, जिसके बाद अब खोदाई का काम भी शुरू कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह पूरा कार्य चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि नदी के प्रवाह को फिर से सुचारु रूप से बहाल किया जा सके। जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने कहा कि इस कार्य में प्रशासन के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों की भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने सभी से अपील की कि सेवा भाव के साथ इस अभियान से जुड़ें और नदी को पुनर्जीवित करने में अपना योगदान दें।
जानकारी के मुताबिक, लगभग 42 किलोमीटर लंबी गोमती नदी की सीमा में अविरल जलधारा बहाने के उद्देश्य से यह अभियान करीब 10 दिन पहले शुरू किया गया था। शुरुआती चरण में सफाई कार्य पर जोर दिया गया और अब जैसे ही खोदाई का काम शुरू हुआ है, परियोजना को नई गति मिल गई है। प्रशासन का मानना है कि यदि यह कार्य निर्धारित समय और योजना के अनुसार पूरा होता है, तो गोमती नदी में एक बार फिर पानी का प्रवाह संभव हो सकेगा।
इस परियोजना के तहत सिर्फ सफाई और खुदाई ही नहीं, बल्कि नदी में पानी पहुंचाने की ठोस व्यवस्था भी की जा रही है। शारदा सागर खंड से गोमती के उद्गम स्थल तक पानी लाने की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए माधोटांडा रजवाहा से जुड़े उस नाले की सफाई और मरम्मत का कार्य भी प्रस्तावित है, जिसे पहले खोदा गया था लेकिन समय के साथ वह अवरुद्ध हो गया। इस नाले को दुरुस्त करने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है, जिससे जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गोमती नदी का पुनर्जीवन क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे न सिर्फ पर्यावरण को लाभ मिलेगा, बल्कि जलस्तर में सुधार, खेती के लिए पानी की उपलब्धता और जैव विविधता के संरक्षण में भी मदद मिलेगी। कई ग्रामीणों ने बताया कि पहले इस नदी में सालभर पानी रहता था, लेकिन समय के साथ इसकी स्थिति खराब होती गई। अब प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयास से एक बार फिर उम्मीद जगी है कि गोमती अपनी पुरानी पहचान हासिल कर सकेगी।
इस अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, युवा, स्वयंसेवी संगठन और प्रशासनिक अधिकारी हिस्सा ले रहे हैं। सभी मिलकर श्रमदान कर रहे हैं और लोगों को जागरूक भी कर रहे हैं कि नदी को साफ और जीवित रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। यह पहल न सिर्फ एक नदी को बचाने का प्रयास है, बल्कि यह समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी एक मजबूत संदेश है।
अगर यह अभियान सफल होता है, तो यह अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है कि सामूहिक प्रयास और सही योजना के साथ किसी भी प्राकृतिक संसाधन को पुनर्जीवित किया जा सकता है। फिलहाल, पीलीभीत में चल रही इस पहल ने एक नई उम्मीद जगाई है कि आने वाले समय में गोमती नदी फिर से अविरल और निर्मल रूप में बहती नजर आएगी।
रिपोर्ट : ऋतिक द्विवेदी
