पीलीभीत : पीलीभीत में मानसून से पहले ही बाढ़ की आशंका के साथ सियासी हलचल तेज हो गई है। जिले में संभावित बाढ़ को लेकर प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने किया, जिनके साथ बड़ी संख्या में समर्थक और स्थानीय लोग मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और पीलीभीत को बाढ़ प्रभावित जिलों की सूची में शामिल करने की मांग उठाई गई।
दरअसल, हाल ही में प्रदेश सरकार द्वारा जारी 44 बाढ़ प्रभावित जिलों की सूची में पीलीभीत का नाम शामिल नहीं किया गया है, जिससे स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कांग्रेस नेता कुमुद गंगवार ने इस फैसले को गंभीर लापरवाही बताते हुए कहा कि हर साल पीलीभीत जिले के कई इलाके बाढ़ की मार झेलते हैं, बावजूद इसके जिले को सूची से बाहर रखना समझ से परे है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिले में बाढ़ रोकने के लिए बनाई जाने वाली ठोकरों (स्पर) के निर्माण में भी भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। उनका कहना है कि हर साल लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद बाढ़ से बचाव के ठोस इंतजाम नहीं किए जाते, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भारी नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों की उदासीनता का भी परिणाम है।
कुमुद गंगवार ने बताया कि स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी की फ्लड मॉक एक्सरसाइज रिपोर्ट-2025 में प्रदेश के 44 जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इस रिपोर्ट में गोमती नदी, शारदा नदी और घाघरा नदी का उल्लेख किया गया है, लेकिन पीलीभीत की प्रमुख नदी देवहा नदी का जिक्र नहीं किया गया, जो हर साल अमरिया, ललौरीखेड़ा, बरखेड़ा और बीसलपुर क्षेत्रों में तबाही मचाती है। इसके अलावा शारदा नदी का असर पूरनपुर क्षेत्र में भी देखा जाता है, जहां हर साल किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है that इस तरह की रिपोर्ट तैयार करते समय जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया गया है। उनका आरोप है कि अगर जिले को संवेदनशील सूची में शामिल नहीं किया गया, तो राहत और बचाव कार्यों में भी बाधा आएगी, जिससे आम जनता को और अधिक परेशानी झेलनी पड़ेगी।
इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता ने जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा है, जिसमें पीलीभीत को बाढ़ प्रभावित जिलों की सूची में शामिल करने की मांग की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ही इस पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो बड़े स्तर पर जन आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसमें किसान और आम नागरिक बड़ी संख्या में भाग लेंगे। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों का भी कहना है कि बाढ़ के दौरान उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। फसलें बर्बाद हो जाती हैं, घरों में पानी भर जाता है और पशुधन तक प्रभावित होता है। इसके बावजूद यदि सरकार और प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से नहीं लेते, तो यह स्थिति और भी चिंताजनक हो सकती है।
फिलहाल पीलीभीत में बाढ़ की आशंका के बीच सियासी बयानबाजी और विरोध प्रदर्शन ने माहौल को और गर्मा दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं और क्या जिले को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की सूची में शामिल किया जाता है या नहीं।
रिपोर्ट : ऋतिक द्विवेदी
