नई दिल्ली : नई दिल्ली इस सप्ताह एक ऐसे वैश्विक आयोजन का केंद्र बनने जा रही है, जिस पर पूरी दुनिया की टेक और नीति से जुड़ी निगाहें टिकी हैं। 16 से 20 फरवरी के बीच आयोजित होने वाला इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 न केवल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य की दिशा तय करेगा, बल्कि यह भी दिखाएगा कि वैश्विक तकनीकी परिदृश्य में भारत की भूमिका कितनी तेजी से मजबूत हुई है। ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और फ्रांस के बाद अब भारत इस प्रतिष्ठित मंच की मेजबानी कर रहा है, जिसे देश की बढ़ती डिजिटल और आर्थिक ताकत के रूप में देखा जा रहा है।
समिट का आयोजन राजधानी के प्रमुख स्थलों भारत मंडपम और सुषमा स्वराज भवन समेत कई जगहों पर किया जा रहा है। इस पांच दिवसीय आयोजन में 100 से अधिक देशों की भागीदारी होगी। करीब 30 देशों की 300 से ज्यादा कंपनियां अपने नवीनतम एआई समाधान, उत्पाद और रिसर्च का प्रदर्शन करेंगी। आयोजकों के अनुसार यह समिट सिर्फ नीति निर्माताओं और कॉर्पोरेट लीडर्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें स्टार्टअप्स, छात्र, शोधकर्ता, किसान और जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोग भी सक्रिय रूप से शामिल होंगे।
हालांकि टेक जगत की एक बड़ी शख्सियत, जेन्सन हुआंग, जिनके इस समिट में शामिल होने की पूरी उम्मीद थी, उन्होंने आखिरी समय में कुछ कारणों से अपना भारत दौरा रद्द कर दिया। इसके बावजूद समिट की चमक कम नहीं हुई है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में दुनिया भर से आए टेक लीडर्स और प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत करेंगे। इसके साथ ही 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी इस मंच पर मौजूद रहेंगे, जिनमें फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लुला डी सिल्वा शामिल हैं।
यह समिट ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत खुद को वैश्विक टेक सुपरपावर के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीते कुछ वर्षों में सरकार ने सेमीकंडक्टर और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग को लेकर बड़े फैसले लिए हैं। 18 अरब डॉलर से अधिक के सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है, ताकि देश में चिप निर्माण और सप्लाई चेन को मजबूत किया जा सके। इसका सीधा असर यह हुआ है कि दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां भारत को निवेश के बड़े केंद्र के रूप में देखने लगी हैं।
इसी कड़ी में Microsoft ने भारत में एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 17.5 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है। सरकार द्वारा डेटा सेंटर्स को 21 साल की टैक्स छूट देने के फैसले ने भी वैश्विक कंपनियों का भरोसा बढ़ाया है, जिससे Nvidia जैसी कंपनियां भारत में निवेश के लिए उत्साहित नजर आ रही हैं। हाल के वर्षों में स्टार्टअप इकोसिस्टम में वेंचर कैपिटल निवेश बढ़ा है और शेयर बाजार में आईपीओ की संख्या में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।
एआई के क्षेत्र में भारत की बढ़ती अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि Anthropic ने भारत में अपने संचालन के लिए पूर्व माइक्रोसॉफ्ट इंडिया प्रमुख इरीना घोष को जिम्मेदारी सौंपी है। वहीं OpenAI ने भी भारत में अलग सेल्स डिवीजन शुरू किया है। शिक्षा के क्षेत्र में Google ने सरकार और Physics Wallah के साथ मिलकर एआई आधारित पहल शुरू की है, जिससे डिजिटल लर्निंग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
यह समिट केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहेगा। 70 हजार वर्ग मीटर में फैले एक्सपो एरिया में 30 देशों की 300 से ज्यादा कंपनियां अपनी तकनीकों का प्रदर्शन करेंगी। खास बात यह है कि इस आयोजन से किसानों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों को भी जोड़ा गया है, ताकि एआई के वास्तविक उपयोग और लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सकें। अब तक दो लाख से ज्यादा लोगों ने इस समिट के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है, जो यह दिखाता है कि भारत में एआई को लेकर उत्साह और उम्मीद दोनों ही चरम पर हैं।
