नई दिल्ली : केंद्र सरकार की ओर से अदालतों में सरकार का पक्ष रखने वाले वकीलों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। लगभग 11 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद केंद्रीय कानून मंत्रालय ने सरकारी वकीलों की फीस में बढ़ोतरी का फैसला किया है। इस निर्णय से देशभर में केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले हजारों वकीलों को सीधा लाभ मिलेगा, जो लंबे समय से फीस संशोधन की मांग कर रहे थे।
कानून मंत्रालय के अधीन कानूनी मामलों के विभाग ने 5 फरवरी को इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना में विभिन्न श्रेणियों के सरकारी वकीलों के लिए संशोधित फीस संरचना का विवरण दिया गया है। सरकारी वकीलों की फीस में इससे पहले आखिरी बार अक्टूबर 2015 में बदलाव किया गया था। इसके बाद से महंगाई और पेशेवर खर्चों में भारी वृद्धि होने के बावजूद फीस में कोई संशोधन नहीं हुआ था।
नई अधिसूचना के अनुसार, ग्रुप ए श्रेणी के वकीलों को नियमित अपीलों और अंतिम सुनवाई वाले मामलों में अब प्रति केस प्रति दिन 21,600 रुपये का भुगतान किया जाएगा। पहले इसी श्रेणी के वकीलों को 13,500 रुपये प्रति केस प्रतिदिन मिलते थे। इसी तरह ग्रुप बी और ग्रुप सी के वकीलों की फीस भी बढ़ाकर 14,400 रुपये प्रति केस प्रति दिन कर दी गई है, जो पहले 9,000 रुपये थी। इस प्रकार सभी श्रेणियों में फीस में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।
इसके अलावा, मंत्रालयों और विभागों के साथ बैठकों, विभिन्न श्रेणियों के मामलों, कानूनी परामर्श और अन्य पेशेवर सेवाओं के लिए मिलने वाली फीस में भी संशोधन किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी न केवल मौजूदा महंगाई को ध्यान में रखकर की गई है, बल्कि सरकारी मुकदमों में गुणवत्ता और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भी जरूरी थी। कानून मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बढ़ती महंगाई, अदालतों में बढ़ते मुकदमों और योग्य कानूनी पेशेवरों को बनाए रखने की चुनौती को देखते हुए यह फैसला काफी पहले लिया जाना चाहिए था। यह प्रस्ताव लंबे समय से लंबित था और विभिन्न स्तरों पर विचाराधीन था। अब इसे लागू किया जाना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लॉ कमीशन ऑफ इंडिया की सदस्य सचिव अंजू राठी राणा ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि केंद्र सरकार के वकीलों के लिए फीस में संशोधन की अधिसूचना अब लागू हो गई है। उन्होंने सभी वकीलों को बधाई देते हुए कहा कि यह फैसला एक दशक से अधिक समय से लंबित था। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों में केंद्र सरकार का प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए प्रतिभाशाली और अनुभवी वकीलों को बनाए रखना बेहद जरूरी है, और फीस में बढ़ोतरी इसी दिशा में एक अहम कदम है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार की ओर से अटार्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल जैसे शीर्ष विधि अधिकारियों के अलावा बड़ी संख्या में वकीलों को विभिन्न अदालतों में कानूनी सलाहकार और सरकारी अधिवक्ता के रूप में नियुक्त किया जाता है। ये वकील सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और निचली अदालतों में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हैं और महत्वपूर्ण संवैधानिक, आपराधिक, दीवानी और नीतिगत मामलों में सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सरकारी वकीलों का मानना है कि फीस में यह बढ़ोतरी न केवल उनके पेशेवर सम्मान को मजबूती देगी, बल्कि युवा और योग्य वकीलों को भी सरकारी पक्ष की पैरवी के लिए प्रोत्साहित करेगी। लंबे समय से कम फीस के कारण कई अनुभवी वकील सरकारी मामलों से दूरी बना रहे थे, जिससे मुकदमों की गुणवत्ता पर भी असर पड़ रहा था। अब इस फैसले से स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। कुल मिलाकर, केंद्र सरकार का यह कदम न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने और सरकारी मुकदमों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।
