दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने दी चेतावनी: AQI खतरनाक स्तर से दोगुना, बच्चों में भी शुरू हो रही हार्ट डिजीज
बरेली : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) भवन में शनिवार से दो दिवसीय IMA UPICON 2025 का भव्य आगाज़ हुआ। देशभर से आए वरिष्ठ चिकित्सकों ने हृदय रोगों के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताई। मेदांता अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कार्तिकेय भार्गव ने कहा कि दिल्ली-NCR की हवा अब सिर्फ खराब नहीं बल्कि खतरनाक स्तर से भी दोगुना जहरीली हो चुकी है, और इसकी जिम्मेदारी केवल सरकारों की नहीं, बल्कि हम सभी की है।
प्रदूषण क्यों बढ़ा? विशेषज्ञ ने बताई असल वजह
डॉ. भार्गव ने कहा कि दिल्ली-NCR में प्रदूषण के खतरनाक स्तर तक पहुँचने के पीछे सिर्फ फैक्ट्री या ट्रैफिक नहीं, बल्कि बदलता लाइफस्टाइल और अनियंत्रित विकास मॉडल भी जिम्मेदार है। इसका मुख्य कारण हरियाली घटकर ‘कंक्रीट जंगल’ में बदल गया है शहर। जनसंख्या बढ़ी, जिसके चलते हाउसहोल्ड कचरा कई गुना बढ़ा है। जरूरत से ज्यादा वाहन खरीदे गए। फिजूल की खरीदारी बढ़ी, जिससे औद्योगिक उत्सर्जन भी बढ़ा। उन्होंने कहा कि प्रदूषण गर्भ से ही बच्चों की पल्मोनरी आर्टरी डिजीज का कारण बन रहा है, यानी कई बच्चे जन्म लेते समय ही श्वसन और रक्तवाहिनी संबंधी समस्याओं के साथ पैदा हो रहे हैं।
हार्ट डिजीज का खतरा,लाइफस्टाइल बना बड़ा कारण
डॉ. भार्गव के अनुसार नमक और चीनी का असंतुलित सेवन, नशे की आदतें, बढ़ता वजन, जंक फूड, शारीरिक गतिविधि कम, रात में नींद की कमी, लगातार स्क्रीन टाइम है। ये सब मिलकर हृदय रोगों को जन्म देते हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी में हार्ट अटैक के बढ़ते मामलों की यह सबसे बड़ी वजहें हैं।
सोशल मीडिया- मानसिक तनाव और BP बढ़ाने वाला नया ‘साइलेंट किलर’
डॉ. भार्गव ने बताया कि सोशल मीडिया के लाइक्स, कमेंट्स और तुलना की संस्कृति से बच्चे और युवा असामान्य मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। गुस्सा बढ़ रहा है, चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है, BP हाई होने लगा, हाइपरटेंशन से हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा
COVID वैक्सीन और हार्ट अटैक पर बड़ा स्पष्टीकरण
उन्होंने कहा कि दुनियाभर के शोधों में अब तक COVID वैक्सीन और अचानक हार्ट अटैक के बीच कोई वैज्ञानिक संबंध नहीं पाया गया है। “दोनों को जोड़कर फैलाई जा रही अफवाहें आधारहीन हैं,” उन्होंने स्पष्ट किया। मेदांता के प्रमुख हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित चंद्रा ने कहा कि अब इलाज के बेहतर विकल्प उपलब्ध हैं। उन्नत वाल्व रिप्लेसमेंट तकनीक, कम जोखिम वाले इंटरवेंशन, शुरुआती निदान पर आधारित ट्रीटमेंट है। उन्होंने कहा कि मरीज यदि समय पर डॉक्टर के पास पहुंचे तो 80% तक मामले आसानी से नियंत्रित किए जा सकते हैं।
यह डॉक्टर थे मौजूद
डॉ. शरद अग्रवाल, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, IMA, डॉ. पी.के. अग्रवाल, अध्यक्ष IMA यूपी, डॉ. आशीष कुमार अग्रवाल, सचिव IMA यूपी, डॉ. वाणी पुरी रावत, कोषाध्यक्ष डॉ. मनजीत सिंह, डायरेक्टर AMS समेत कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टर, मेडिकल स्टूडेंट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।
