कोलकाता : पश्चिम बंगाल, मणिपुर, पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर चुनाव आयोग ने मतदान और मतगणना में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों के मानदेय में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया है। लोकतंत्र के इस महापर्व को सफल बनाने के लिए जो लोग दिन-रात मेहनत करते हैं, उन्हें अब उनके योगदान के लिए वित्तीय सम्मान मिलेगा। चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह फैसला कर्मचारियों की कड़ी मेहनत और तनावपूर्ण ड्यूटी को ध्यान में रखकर लिया गया है। आयोग का मानना है कि बढ़ाया गया भत्ता कर्मचारियों की कार्य क्षमता और उत्साह में इजाफा करेगा और वे पूरी ऊर्जा के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे।
किसे कितना मिलेगा?
सबसे अधिक जिम्मेदारी संभालने वाले पीठासीन अधिकारियों का दैनिक भत्ता 350 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये कर दिया गया है। यानी पूरे असाइनमेंट के लिए अब उन्हें कुल 2,000 रुपये मिलेंगे। वहीं पोलिंग अधिकारियों का दैनिक भत्ता 250 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपये किया गया है, जिससे पूरे कार्यकाल के लिए उन्हें 1,600 रुपये मिलेंगे। मतगणना में लगे कर्मचारियों को भी बढ़ावा मिला है। उनके दैनिक भत्ते को 250 रुपये से बढ़ाकर 450 रुपये कर दिया गया है। वहीं, पोलिंग स्टेशनों पर तैनात चौथे श्रेणी के कर्मचारियों का भत्ता 200 रुपये से बढ़ाकर 350 रुपये प्रतिदिन किया गया है।
सुरक्षा बल और निगरानी टीमों के लिए राहत
चुनाव आयोग ने सुरक्षा और निगरानी टीमों का भी ध्यान रखा है। माइक्रो-ऑब्जर्वर्स का भत्ता 1,000 रुपये से दोगुना कर 2,000 रुपये कर दिया गया है। फील्ड में तैनात पुलिस कर्मी, होमगार्ड और मोबाइल टीमों के लिए खाना-पीने का खर्च 150 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन किया गया है। इसके अलावा केंद्रीय सुरक्षा बलों के गजेटेड अफसरों को 15 दिन की ड्यूटी के लिए 2,500 रुपये की बजाय 4,000 रुपये मिलेंगे। वहीं, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के स्टाफ को अब 3,000 रुपये दिए जाएंगे।
सीनियर अधिकारियों को बोनस
इस बार सीनियर अधिकारियों के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। डिप्टी डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर को उनके मानदेय के रूप में कम से कम एक महीने का बेसिक पे दिया जाएगा। इसके अलावा क्लास-1 और क्लास-2 अधिकारियों के लिए एकमुश्त राशि 1,200 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये कर दी गई है।चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव कराने वाले हर हाथ की कीमत को समझा गया है और उनके योगदान का उचित सम्मान किया जाएगा।
चुनाव कर्मचारियों की भूमिका
चुनाव आयोग के अनुसार, चुनाव में लगे अधिकारी और कर्मचारी ही लोकतंत्र की आधारशिला हैं। मतदान और मतगणना की ड्यूटी में भारी मेहनत, लंबी ड्यूटी घंटे, तनाव और कभी-कभी असुरक्षित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में बढ़ाया गया मानदेय न केवल उनकी मेहनत का उचित सम्मान है, बल्कि उन्हें जिम्मेदारियों को और प्रभावी तरीके से निभाने के लिए प्रेरित करेगा। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, पंजाब और मणिपुर जैसे राज्यों में चुनावी प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण होती है। यहां सुरक्षा, मतदाता व्यवस्था और मतदान केंद्रों की निगरानी में कर्मचारियों का योगदान अहम होता है। इस बढ़ोतरी से चुनाव आयोग की कोशिश है कि सभी कर्मचारी पूरी ईमानदारी और तत्परता के साथ अपनी ड्यूटी निभाएं। चुनाव आयोग ने कहा कि यह बढ़ोतरी पिछले वर्षों की तुलना में सबसे बड़ा कदम है। इससे यह संदेश जाता है कि चुनाव में लगे सभी अधिकारी और कर्मचारी महत्वपूर्ण हैं और उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। नए भत्तों के साथ, चुनावी कार्यों में लगे अधिकारी और कर्मचारी अब वित्तीय दृष्टि से भी संतुष्ट होंगे और लोकतंत्र की प्रक्रिया को मजबूत बनाने में पूरी तरह जुट सकेंगे।
