लखनऊ। डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में देश के होने वाले चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अपने अनुभव साझा करते हुए कानून के छात्रों को प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब वे लोकल कोर्ट में प्रैक्टिस करते थे, तब एक बार ओवरकॉन्फिडेंस के कारण प्रॉपर्टी विवाद का केस हार गए थे। उस दिन से उन्होंने एक नोटबुक अपने पास रखना शुरू किया, जिसमें वे हर गलती और सीख को नोट करते हैं, ताकि खुद को बेहतर बना सकें।
उन्होंने कहा , “मैंने ऐसे वकील देखे हैं जो कभी एक्सीलेंट थे, लेकिन खुद को अपडेट न करने की वजह से आउटडेटेड हो गए। इसलिए सेल्फ एग्जामिनेशन की आदत डालें। खुद से पूछें — क्या मैंने केस की तैयारी ठीक से की? क्या मैंने बहस सही की? क्योंकि केस जीतने से ज्यादा अहम है न्याय मिलना।”
सूर्यकांत ने कहा कि 15 साल की प्रैक्टिस के बाद हर वकील को खुद से ये सवाल करना चाहिए कि क्या उसका केस आने वाले सौ केसों के समाधान में मददगार है या नहीं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा — “पहले हमारे डिस्ट्रिक्ट जज के चैंबर में AC नहीं था। हमने इसकी व्यवस्था इसलिए की ताकि जब बार को कभी गुस्सा आए तो AC के जरिए उनका गुस्सा शांत हो सके।”
मुख्यमंत्री ने आगे कहा ,“सत्य बोलना और धर्म की रक्षा करना हमारे जीवन की पद्धति है। उपासना सबकी अलग हो सकती है, लेकिन धर्म सबका एक है।”
