नई दिल्ली/पटना/लखनऊ : चुनाव आयोग ने शनिवार को 334 पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPP) का पंजीकरण रद्द कर दिया है। इन दलों ने 2019 के बाद से कोई भी चुनाव नहीं लड़ा था, और इनके दफ्तरों का भौतिक अस्तित्व भी नहीं पाया गया। यह कार्रवाई बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीतिक पारदर्शिता और व्यवस्था की सफाई की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
RUPP क्या है, और क्यों हुई कार्रवाई?

Registered Unrecognised Political Parties (RUPP) वे दल होते हैं, जो चुनाव आयोग के पास पंजीकृत होते हैं, लेकिन राष्ट्रीय या राज्य स्तर की मान्यता प्राप्त नहीं करते। पंजीकरण के बाद इन्हें टैक्स छूट जैसे कुछ फायदे मिलते हैं।
देश में कुल 2,854 RUPP थे,लेकिन अब यह संख्या घटकर 2,520 रह गई है। रद्द किए गए दल 2019 के बाद से न तो लोकसभा और न ही विधानसभा या उपचुनाव में शामिल हुए थे।
आयोग का नियम और कानूनी पहलू
चुनाव आयोग ने ‘डीलिस्टिंग’ का इस्तेमाल किया, जिसके तहत ऐसे दलों को पंजीकृत दलों की सूची से हटा दिया जाता है। प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 29A के तहत कोई भी दल अगर लगातार 6 साल तक चुनाव में हिस्सा नहीं लेता, तो उसका पंजीकरण रद्द किया जा सकता है। हालांकि, ये दल दोबारा रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
अब सिर्फ 6 राष्ट्रीय राजनीतिक दल
देश में अब 6 राष्ट्रीय दल, 67 राज्य स्तरीय दल, 2,520 गैर-मान्यता प्राप्त पंजीकृत दल बचे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कार्रवाई बिहार चुनाव से पहले फर्जी और निष्क्रिय दलों पर लगाम लगाने में मदद करेगी, जिससे राजनीतिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।
