न्यूज़ एजेंसी
झांसी: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आरएसएस और वर्तमान सरकार पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आरएसएस एक नॉन-रजिस्टर्ड संस्था है, जो दंगे भड़काने का काम करती है। दिग्विजय ने कहा, RSS के लोग कहते हैं कि मुस्लिमों की आबादी बढ़ रही है। सच्चाई यह है कि हिंदुओं की आबादी के मुकाबले मुस्लिम आबादी अधिक नहीं बढ़ी बल्कि घटी है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि सरकार चाहे तो दंगे कभी भी नहीं हो सकते। उनका कहना था कि दंगे सरकार और अफसरों की नीयत पर निर्भर करते हैं। उन्होंने बरेली बवाल का जिक्र करते हुए कहा कि तौकीर रजा जैसे लोग दोनों समुदायों में मौजूद हैं और भड़काऊ भाषण देकर माहौल खराब करते हैं।
चंदा वसूली और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल
दिग्विजय सिंह ने आरएसएस की चंदा वसूली पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि हर विजयादशमी और गुरु पूर्णिमा पर करोड़ों रुपए चंदा के रूप में आते हैं, लेकिन संगठन का बैंक खाता या वित्तीय रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं है। उन्होंने कहा, इनका एक ही एजेंडा है, हिंदुओं को भड़काना और संविधान के खिलाफ लोगों को तैयार करना। यदि नॉन-रजिस्टर्ड संस्था ने 7 करोड़ रुपए जनता से लिए, तो यह तय करना चाहिए कि यह पैसा कहां खर्च हुआ। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच होनी चाहिए।
इसके अलावा दिग्विजय ने स्पष्ट किया कि यदि कोई ‘I LOVE मोहम्मद’ कहता है और कोई ‘I LOVE राम’, ‘I LOVE महादेव’ या ‘I LOVE कृष्ण’ कहता है, तो इसमें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। उनके अनुसार, इस तरह के मामलो में FIR दर्ज करना गैरजरूरी और राजनीतिक रूप से उत्तेजक है।
बरेली/संभल-बुलडोजर और घुसपैठियों पर टिप्पणी
संभल में हुई बुलडोजर कार्रवाई पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि अवैध निर्माण पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन किसी व्यक्ति के अपराध के लिए पूरे परिवार को दंडित करना न्याय के खिलाफ है। उन्होंने केंद्र सरकार से घुसपैठियों की सूची सार्वजनिक करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि 11 साल से भाजपा की सरकार है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कौन नेपाल या बांग्लादेश से आया घुसपैठिया है।
दिग्विजय ने कोविड के समय आरएसएस द्वारा कहा गया 7 करोड़ रुपए की मदद का भी उदाहरण देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखने का हवाला दिया। उनका कहना था कि जब नॉन-रजिस्टर्ड संस्था सार्वजनिक रूप से 7 करोड़ खर्च करने का दावा कर रही है, तो इसका ट्रैक रिकॉर्ड सार्वजनिक होना चाहिए।
