नई दिल्ली/बरेली : बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने बताया कि भारत सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।।जिसमें घोषणा की गई कि चार नए लेबर कोड अब देश में लागू हो चुके हैं। इसके बाद से ही देशभर में हलचल है। अखबारों और टीवी चैनलों पर बड़े-बड़े सरकारी विज्ञापन चल रहे हैं, लेकिन ट्रेड यूनियनों का कहना है कि “यह लेबर सुधार नहीं, मेहनतकश लोगों पर खुला युद्ध है।”देश की सभी 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (CTUs) और स्वतंत्र औद्योगिक महासंघों ने 26 नवंबर 2025 को देशव्यापी प्रतिरोध दिवस मनाने का ऐलान कर दिया है।
21वीं सदी का गुलामी कानून है- यूनियनों का बड़ा आरोप
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने कहा कि “सरकार ने 29 मौजूदा श्रम कानून खत्म कर, चार लेबर कोड लागू कर दिए। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को दरकिनार कर किया गया सबसे बड़ा हमला है।”ये चार कोड हैं- कोड ऑन वेजेज, 2019, इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड, 2020, सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 और ऑक्युपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020। यूनियनों का आरोप है कि ये कोड मजदूरों के लगभग सभी अधिकार खत्म करते हैं। हड़ताल करना लगभग असंभव बना देंगे। कॉन्ट्रैक्ट वर्क और फिक्स्ड टर्म रोजगार को बढ़ावा देंगे। यूनियन बनाने की आज़ादी लगभग खत्म कर देंगे।सोशल सिक्योरिटी कमज़ोर होगी।।सुरक्षा मानकों की जगह कॉरपोरेट हित हावी होंगे
किसानों पर काले कानून, अब मजदूरों पर काले कोड- CTU का बयान
यूनियनों ने कहा है कि “किसानों पर कृषि कानून लागू किए गए, और पूरे देश के संघर्ष के बाद वापस लेने पड़े।
अब मजदूरों के लिए चार लेबर कोड थोप दिए गए हैं। यह 25 करोड़ मज़दूरों की अनदेखी है।”उन्होंने 2004 में लागू हुई न्यू पेंशन स्कीम (NPS) को याद किया। सरकार ने तब भी बड़े दावे किए थे, लेकिन अब पूरा देश पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहा है।
यह है मज़दूर आंदोलन की टाइमलाइन
2019 में कोड ऑन वेजेज के खिलाफ देशव्यापी विरोध, जनवरी 2020 में ऐतिहासिक आम हड़ताल, सितंबर 2020 में तीन और लेबर कोड पास,26 नवंबर 2020 में संयुक्त किसान आंदोलन + मजदूर हड़ताल, 2021-24 में लगातार संयुक्त प्रदर्शन, 9 जुलाई 2025- सबसे बड़ी हड़ताल, 25 करोड़ मजदूर शामिल, 21 नवंबर 2025- सरकार ने कोड लागू कर दिए और 26 नवंबर 2025 में प्रतिरोध दिवस का ऐलान किया गया है।
ट्रेड यूनियनों का ऐलान:
“यह लड़ाई अब निर्णायक है,लेबर कोड वापस कराओ!”संयुक्त मंच का कहना है कि अगर ये कोड लागू रहे तो आने वाली पीढ़ियाँ गुलामी जैसी स्थितियों में काम करेंगी। यह मज़दूरों की उम्मीद, सपनों और अधिकारों का गला घोंटने जैसा है।
CTU की यह हैं प्रमुख मांगें
चारों लेबर कोड तुरंत वापस लिए जाएँ। ड्राफ्ट श्रम शक्ति नीति 2025 वापस ली जाए। सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा मिले। समान वेतन-समान काम का नियम लागू हो। गहरे बेरोज़गारी संकट पर ठोस कदम उठाए जाएँ।।किसान-मज़दूर एकजुट आंदोलन की तैयारी है। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भी मजदूर संगठनों के साथ कंधे से कंधा मिलाया है। 26 नवंबर को गांवों से लेकर शहरों तक संयुक्त प्रदर्शन होगा। यह किसानों और मजदूरों की ऐतिहासिक एकजुटता का नया अध्याय होगा। यूनियन ने मज़दूर कोड वापस होने तक संघर्ष जारी रहेगा! CTU का स्पष्ट बयान है कि यह नोटिफिकेशन मज़दूरों पर हमला नहीं, बल्कि युद्ध की घोषणा है। और हम इस युद्ध का जवाब देशव्यापी संघर्ष से देंगे। देश के फैक्ट्रियों, खेतों, कार्यालयों, बैंक, परिवहन, निर्माण क्षेत्र समेत हर जगह प्रदर्शन की तैयारी है।
