नई दिल्ली : कांग्रेस ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का गंभीर आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला। कांग्रेस का कहना है कि प्रधानमंत्री न सिर्फ ऐतिहासिक तथ्यों को नजरअंदाज कर रहे हैं, बल्कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के इतिहास से भी छेड़छाड़ की कोशिश की जा रही है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि बीते महीने संसद में वंदे मातरम पर हुई चर्चा के दौरान गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का अपमान करने का प्रयास किया गया।
कांग्रेस के संचार प्रभारी और महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री पर महात्मा गांधी की स्मृतियों और विरासत को “व्यवस्थित तरीके से मिटाने” का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि संसद में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान पर हुई हालिया चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री और उनके सहयोगियों का रवैया देश के सामने बेनकाब हो गया। जयराम रमेश के अनुसार, इस चर्चा में न केवल राष्ट्रगान के इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश की गई, बल्कि रवींद्रनाथ टैगोर के योगदान को भी कमतर दिखाने का प्रयास हुआ।
जयराम रमेश ने यह भी कहा कि 23 जनवरी 2026 को देश नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती मना रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री ने जानबूझकर नेताजी की ऐतिहासिक भूमिका का जिक्र नहीं किया। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1937 में वंदे मातरम की पंक्तियों को लेकर जो विवाद खड़ा हुआ था, उसे सुलझाने में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अहम भूमिका रही थी।
कांग्रेस नेता ने नेताजी के परपोते और प्रख्यात इतिहासकार सुगत बोस के हवाले से लिखा कि नेताजी ने 2 नवंबर 1942 को बर्लिन में फ्री इंडिया सेंटर के उद्घाटन के अवसर पर राष्ट्रगान के रूप में “जन गण मन” गाया था। इसके अलावा 6 जुलाई 1944 को सिंगापुर से प्रसारित अपने संदेश में नेताजी ने पहली बार महात्मा गांधी को “राष्ट्रपिता” कहकर संबोधित किया था। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि इसके बावजूद मौजूदा सरकार महात्मा गांधी की विरासत को कमजोर करने का प्रयास कर रही है और मनरेगा कानून को वापस लेने की कोशिश इसका ताजा उदाहरण है।
गौरतलब है कि बीते माह संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विशेष चर्चा आयोजित की गई थी। इस चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली थी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया था कि बंगाल में चुनाव को देखते हुए वंदे मातरम पर विशेष चर्चा कराई गई और इसके जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस ने भाजपा पर वंदे मातरम के नाम पर राजनीति करने और इतिहास को नए सिरे से लिखने का आरोप लगाया। वहीं, सत्तापक्ष ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए पलटवार किया और कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया। इस पूरे मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है और एक बार फिर इतिहास, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत को लेकर सियासी घमासान देखने को मिल रहा है।
