नई दिल्ली : आज केंद्र सरकार की कैबिनेट मीटिंग से तीन बड़े फैसले सामने आए हैं, जिनका सीधा असर देश की जनगणना प्रक्रिया, कोयला क्षेत्र में सुधार और किसानों से जुड़ी एमएसपी नीति पर पड़ेगा। कैबिनेट ने सबसे पहले आगामी जनगणना 2027 के लिए 11,718 करोड़ रुपये के विशाल बजट को मंजूरी दी है। यह जनगणना अब तक का सबसे बड़ा प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभ्यास होने जा रही है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह स्वतंत्रता के बाद की आठवीं और कुल 16वीं जनगणना होगी। पिछली जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि 2021 की जनगणना कोविड महामारी के कारण टाल दी गई थी।
जनगणना 2027 के लिए दो चरण निर्धारित किए गए हैं। पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास जनगणना होगी, जिसे अप्रैल से सितंबर 2026 तक पूरा किया जाएगा। दूसरा चरण जनसंख्या गणना का होगा, जो फरवरी 2027 से शुरू होगा। हिमालयी और बर्फ से ढके क्षेत्रों में यह प्रक्रिया कुछ पहले, यानी सितंबर 2026 से ही शुरू कर दी जाएगी। सामान्य क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 और बर्फीले इलाकों के लिए 1 अक्टूबर 2026 तय की गई है।
सरकार ने बताया कि इस बार जाति गणना को भी जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। साथ ही पहली बार लोगों को self-enumeration, यानी स्वयं अपनी जानकारी भरने का विकल्प भी दिया जाएगा। जनगणना-एक-सेवा (CaaS) के ज़रिए विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों को मशीन-पठनीय डैशबोर्ड उपलब्ध कराया जाएगा। बड़ी बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 30 लाख जमीनी कार्यकर्ता शामिल होंगे और 1.02 करोड़ मानव-दिवस का रोजगार पैदा होगा।
दूसरा बड़ा फैसला कोयले के क्षेत्र से जुड़ा है। कैबिनेट ने कोयला लिंकेज नीति में सुधार करते हुए CoalSETU नाम की नई विंडो को मंजूरी दे दी है। अब देश में कोयला केवल विशेष क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। कोई भी घरेलू खरीदार नीलामी के माध्यम से कोयला लिंकेज प्राप्त कर सकेगा। कोयले का उपयोग अब केवल अंतिम उपयोगकर्ता उद्योग तक सीमित नहीं रहेगा—इसे स्वयं उपयोग, निर्यात या कोयला धुलाई जैसे किसी भी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। लिंकेज धारक 50% तक कोयला निर्यात भी कर सकेंगे। ईंधन आपूर्ति समझौता अधिकतम 15 वर्षों तक किया जाएगा और समूह की कंपनियों के बीच लचीला उपयोग भी संभव होगा। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश अब कोयले में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। 2024–25 में भारत ने पहली बार 1 अरब टन से अधिक कोयला उत्पादन किया है। आयात में 7.9% की कमी आई है, जिससे 60 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।
