डिजिटल गिरफ्तारी से शुरू हुआ खेल, सुप्रीम कोर्ट की फर्जी बेल कॉपी से हुआ ‘फाइनल पंच’
बरेली/शाहजहांपुर : यूपी के शाहजहांपुर में हाई-टेक साइबर अपराध का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिसमें खुद को सीबीआई अफसर बताकर जालसाजों ने एक व्यापारी से एक करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर ली। पूरा फर्जीवाड़ा इतनी सफाई से रचा गया कि पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट कर, वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल कोर्ट’ में पेश किया गया और सुप्रीम कोर्ट की जाली बेल कॉपी तक थमा दी गई।
कैसे रचा गया फर्जीवाड़े का ये हाई-टेक जाल ?
6 मई को चौक कोतवाली थाना क्षेत्र निवासी एक व्यापारी के पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई के आईपीएस अधिकारी विजय खन्ना बताया और कहा कि वित्त मंत्रालय की ओर से उनके खिलाफ मामला दर्ज है। आरोप लगाया गया कि व्यापारी के खाते से 2.80 करोड़ का ट्रांजैक्शन सेंट्रल बैंक, मुंबई में हुआ है। व्यापारी ने इंकार किया और तब शुरू हुआ डराने-धमकाने का सिलसिला। अगले दिन 7 मई को व्यापारी को बताया गया कि उसे जस्टिस खन्ना के सामने वीडियो कॉल के ज़रिए पेश होना होगा, जहां से उसे ज़मानत मिल सकती है।
“डिजिटल कोर्ट” में जज की फर्जी सुनवाई और आरटीजीएस से रकम ट्रांसफर
लैपटॉप से “कोर्ट में पेश” व्यापारी को आदेश मिला कि उसकी 94 लाख की एफडी को तुरंत लिक्विडेट करके एक विशेष खाते में ट्रांसफर किया जाए। 14 मई को व्यापारी ने 71 लाख भेज दिए। इसके बाद आरोपी ने कथित सुप्रीम कोर्ट से मिली बेल ऑर्डर की फर्जी कॉपी भी भेजी। विश्वास दिलाने के लिए व्यापारी से 9.50 लाख, 23.45 लाख और अलग-अलग माध्यमों से 32,000 तक की रकम ऐंठी गई। कुल मिलाकर ठगों ने 1 करोड़ 2 लाख की रकम हड़प ली।
सुप्रीम कोर्ट की फर्जी चिट्ठी से खुली पोल
19 मई को पीड़ित के पास एक और पत्र आया। जिसमें उसे सभी आरोपों से बरी किया गया और रकम वापसी की बात कही गई। इसके बाद से न तो विजय खन्ना का कोई संपर्क हुआ और न ही कोई पैसा वापस आया। यहीं पर व्यापारी को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का अहसास हुआ।
एफआईआर दर्ज, साइबर सेल कर रही जांच
शाहजहांपुर पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर धोखाधड़ी और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। एसपी राजेश द्विवेदी के अनुसार, “तीन टीमों का गठन कर जांच शुरू कर दी गई है। जल्द ही खुलासा किया जाएगा।”
सावधान रहें! डिजिटल गिरफ्तारी और वीडियो कोर्ट जैसी चालों से बचें
यह घटना देश में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड और फर्जीवाड़ों की एक भयावह तस्वीर पेश करती है। यदि कोई खुद को अधिकारी बताकर डराने की कोशिश करे, तो बिना पुष्टि के कोई रकम न ट्रांसफर करें। जरूरत पड़ने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें।
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