बदायूँ : उत्तर प्रदेश सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और त्वरित एंबुलेंस सुविधा के बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन बदायूं से सामने आई तस्वीरें इन दावों की हकीकत बयां कर रही हैं। यहां एक घायल युवक करीब चार घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार करता रहा, लेकिन मदद नहीं पहुंची। हालात इतने खराब हो गए कि परिजनों को घायल युवक को चारपाई पर लिटाकर ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाना पड़ा। आर्थिक तंगी के चलते परिवार इलाज तक नहीं करा सका और सिर्फ एक्सरे कराने के बाद युवक को वापस घर ले आया। चिलचिलाती धूप में चारपाई पर मरीज को ढोते परिजनों की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
ये मामला बदायूं जिले के उसैहत थाना क्षेत्र के गांव अक्टुइया कलां का है। बताया जा रहा है कि महेश नाम का युवक अपनी बहन के घर आया हुआ था। शनिवार रात वह घर की छत पर सो रहा था। सुबह करीब तीन बजे जब वह टॉयलेट जाने के लिए उठा, तभी अचानक उसका पैर फिसल गया और वह छत से नीचे गिर पड़ा। हादसे में महेश गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना के बाद परिजनों ने तुरंत एंबुलेंस सेवा को कई बार फोन किया, लेकिन करीब चार घंटे तक कोई एंबुलेंस गांव नहीं पहुंची। घायल युवक दर्द से तड़पता रहा और परिवार मदद का इंतजार करता रहा। जब कोई सहारा नहीं मिला तो मजबूरन परिजनों ने एक ई-रिक्शा का इंतजाम किया। ई-रिक्शा पर चारपाई रखी गई और उसी पर घायल महेश को लिटाकर कस्बा उसैहत के एक निजी डॉक्टर के पास ले जाया गया।
डॉक्टर द्वारा कराए गए एक्सरे में युवक की हड्डी टूटने की पुष्टि हुई, लेकिन परिवार की आर्थिक हालत इतनी कमजोर थी कि आगे का इलाज कराना संभव नहीं हो सका। मजबूरी में परिजन घायल महेश को दोबारा उसी चारपाई पर ई-रिक्शा से घर वापस ले आए। अब परिवार का कहना है कि जैसे-तैसे पैसे का इंतजाम होने पर महेश को बदायूं इलाज के लिए ले जाया जाएगा। गरीब परिवार की यह बेबसी और समय पर एंबुलेंस न मिलने की घटना स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आखिर जरूरत के समय सरकारी एंबुलेंस सेवा लोगों तक क्यों नहीं पहुंच पा रही है?
