लखनऊ : रविवार को बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बड़ी बैठक बुलाई, जिसमें देशभर से पार्टी के शीर्ष पदाधिकारी शामिल हुए। यह पिछले 10 दिनों में बसपा का तीसरा बड़ा कार्यक्रम है, जिससे साफ है कि पार्टी अब आने वाले चुनावों की तैयारियों में पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। इस बैठक में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को छोड़कर बाकी सभी राज्यों के करीब 430 कोऑर्डिनेटर पहुंचे हैं, जिनमें तीन महिला कोऑर्डिनेटर भी शामिल हैं। यूपी और उत्तराखंड की समीक्षा बैठक पहले ही पूरी हो चुकी थी।
बैठक लखनऊ स्थित पार्टी के प्रदेश कार्यालय में चल रही है। मंच पर बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ-साथ उनके भरोसेमंद नेताओं में सतीश चंद्र मिश्रा, आनंद कुमार और आकाश आनंद मौजूद हैं। यह उपस्थिति इस बात का संकेत है कि पार्टी नेतृत्व अब पूरी एकजुटता के साथ संगठन को पुनः मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में पार्टी संगठन के ढांचे, आगामी कार्यक्रमों और राज्यों में जनसंपर्क अभियानों की रणनीति पर चर्चा हो रही है। खासतौर पर उत्तर प्रदेश की तरह अन्य राज्यों में भी बड़ी रैलियों के आयोजन पर जोर दिया जा रहा है, ताकि बहुजन समाज पार्टी का जनाधार फिर से सक्रिय किया जा सके।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में कई अहम फैसले लिए जा सकते हैं। इनमें सबसे चर्चित संभावना बसपा के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और नेशनल कोऑर्डिनेटर जयप्रकाश सिंह की पार्टी में वापसी की है। जयप्रकाश सिंह, जो एक समय मायावती के बेहद करीबी माने जाते थे, कुछ साल पहले पार्टी से अलग हो गए थे। अब चर्चा है कि उनकी एक वरिष्ठ नेता के माध्यम से मायावती से बातचीत हो चुकी है और उनकी घर वापसी पर अंतिम फैसला इसी बैठक में लिया जा सकता है। हालांकि जयप्रकाश सिंह ने सार्वजनिक रूप से इस तरह की किसी मुलाकात या बातचीत से इनकार किया है, लेकिन पार्टी के अंदर इसे लेकर उत्सुकता बनी हुई है।
पार्टी सूत्रों का मानना है कि बसपा आने वाले महीनों में न सिर्फ अपने पुराने कार्यकर्ताओं को वापस लाने की कोशिश करेगी, बल्कि नए चेहरों को भी मौका देगी। मायावती इस बैठक के जरिए यह संदेश देना चाहती हैं कि बसपा अभी भी देश की राजनीति में एक मजबूत विकल्प बनने की क्षमता रखती है। लखनऊ में चल रही यह बैठक आने वाले समय में पार्टी की दिशा और रणनीति तय करने में निर्णायक साबित हो सकती है।
